Babuaa Desk

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भारत के दूसरे राष्ट्रपति , देश के पहले उपराष्ट्रपति बनने से पहले दर्शन शास्त्र के प्रध्यापक थे। भारतीय संस्कृति और आध्यात्म का गम्भीर अध्ययन करने के बाद वे प्राध्यापक के रूप में छात्रों के बीच वे बहुत लोकप्रिय थे। उनका मानना था कि शिक्षक उन्ही लोगो को बनना चाहिए जो छात्रों से आदर और स्नेह अर्जित कर सके। वे शिक्षक बनने के लिए ब बुद्धिमान होने केज़ात योग्यता को भी अनिवार्य मानते थे। जो शिक्षक शिक्षा के प्रति समर्पित न हो, शिक्षा को मिशन न माने वह अच्छा शिक्षक नही हो सकता है। उनके शिक्षक होने की लोकप्रियता का अंदाज़ा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब वे मैसूर यूनिवर्सिटी से कलकत्ता यूनिवर्सिटी पढ़ाने के लिए जा रहे थे तो मैसूर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने बग्घी को फूलों से सजा कर राधाकृष्णन को रेल्वे स्टेशन तक छोडने गए। शिक्षक राष्ट्रपति-राधाकृष्णन

23 Jun 2022 07:40AM,
by: Babuaa Desk