Babuaa Desk

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 देश के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेन्द्र प्रसाद बहुत ही सरल सहज व्यक्ति थे, उनके रहन सहन को देख कर लगता था मानो खेत से कोई किसान निकल कर राष्ट्रपति भवन पहुँच गया हो। सहजता के अलावा देश के पहले राष्ट्रपति का हिंदी प्रेम अनोखा था। वे हिंदी को सर्वश्रेष्ठ मुक़ाम पर पहुँचाने के लिए अपने भगीरथ प्रयास को निरंतरता दिए हुए थे। वे स्वतंत्रता संग्राम की लड़ाई में बराबरी की हिस्सेदारी रखे हुए थे लेकिन हिंदी के प्रति उनकी गम्भीरता भी बराबर की थी। वे भारत मित्र, भारतोदया, कमला पत्रिका में लेख लिखते जो समाज मे चेतना के लिए होते थे। वे1912 में कोलकाता में होने वाले अखिल भारतीय हिंदी सम्मेलन में प्रधानमंत्री थे ।1923 में वे काकीनाड़ा अधिवेशन में अध्यक्ष बने थे लेकिन बीमारी के कारण जा नही सके। उनका भाषण जमनालाल बजाज ने पढ़ा। 

22 Jun 2022 01:05AM,
by: Babuaa Desk