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रायपुर,08 अप्रैल 2026राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन ‘‘बिहान’’ अंतर्गत स्व-सहायता समूह की महिलाओं को विभिन्न आजीविका मूलक गतिविधियों से जोड़कर उनके परिवार की वार्षिक आय 01 लाख रूपये या उससे अधिक आय अर्जित करने में सक्षम बनाकर आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है। जिसके तहत् बालोद जिले में 20 हजार 982 लखपति दीदी बनायी गई है। इसके विस्तृत स्वरूप में लखपति ग्राम की अवधारणा भी विकसित की गई है जो कि ग्रामीण विकास की एक ऐसी दूरदर्शी सोच है, जिसके केंद्र में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक उन्नति है। बालोद जिले में इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि गाँव का प्रत्येक परिवार सालाना कम से कम 01 लाख रुपये या उससे अधिक की शुद्ध आय अर्जित कर सके। यहाँ इस अवधारणा के निम्न मुख्य पहलुओं को लेकर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एवं विभागीय उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में बालोद जिले में कार्य कराया जा रहा है। लखपति ग्राम का लक्ष्य केवल गरीबी रेखा से बाहर निकलना नहीं है बल्कि ग्रामीण परिवारों को ’लखपति दीदी’ के रूप में विकसित करके उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाना है। यह स्थायी आजीविका और बेहतर जीवन स्तर पर केंद्रित है जिसके तहत् बहुआयामी आजीविका स्त्रोत को प्राथमिकता दी गई जिसमें एक परिवार केवल एक स्त्रोत जैसे सिर्फ खेती पर निर्भर रहकर लखपति नहीं बन सकता। इसके लिए 03-04 विभिन्न आय के स्रोतों को अपनाया गया है। उन्नत कृषि अंतर्गत जैसे बेमौसमी सब्जियाँ, नकदी फसलें और जैविक खेत, पशुपालन अंतर्गत डेयरी, बकरी पालन, मुर्गी पालन या मत्स्य पालन, गैर कृषि उद्यम अंतर्गत मशरूम उत्पादन, सिलाई या छोटे ग्रामीण उद्योग, कौशल विकास अंतर्गत प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत तकनीकी प्रशिक्षण शामिल है। 
    जिले में लखपति ग्राम की सफलता हेतु निम्न बिन्दुओं को आधार बनाकर क्रियान्वयन किया जा रहा है। प्रत्येक परिवार की उनकी वर्तमान आय और भविष्य के लक्ष्यों के आधार पर एक ’आजीविका योजना’  तैयार कराया गया है। तत्पश्चात् वित्तीय समावेशन के माध्यम से कम ब्याज पर बैंक ऋण 4054 एसएचजी को 114 करोड़ ऋण प्रदाय किया गया है एवं वूमेन लेड इंटरप्राईज फायनेंस के तहत् 801 एसएचजी को 10 करोड़ का ऋण दिया किया गया है। इसी क्रम में स्व-सहायता समूह द्वारा उत्पादित वस्तुओं को क्षेत्रीय सरस मेला, स्थानीय बाजार एवं शासकीय कार्यालय मंे स्टाॅल लगाकर विक्रय किया जा रहा है। स्वयं सहायता समूहों और ग्राम संगठनों के माध्यम से सामूहिक शक्ति का उपयोग कर एक तंत्र का निर्माण किया गया है। 
इस अवधारणा को धरातल पर उतारने के लिए ’आजीविका सखियों’ और ’पशु सखियों’ की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, जो घर-घर जाकर महिलाओं को तकनीकी जानकारी और प्रशिक्षण प्रदान करती हैं। बालोद जिले के लिए यह गौरव का विषय है कि डौंडी विकासखंड का औराटोला गाँव जिले का प्रथम ’लखपति ग्राम’ बनकर उभरा है। इस गाँव ने यह सिद्ध कर दिया है कि यदि सही मार्गदर्शन और दृढ़ इच्छा शक्ति हो तो सामूहिक प्रयास से गरीबी को मात दी जा सकती है।      औराटोला की सफलता के पीछे बिहान योजना और महिलाओं की अटूट मेहनत है। यहाँ की महिलाओं ने पारंपरिक खेती के दायरे से बाहर निकलकर बहुआयामी आजीविका को अपनाया। गाँव में अब दर्जनों ऐसी महिलाएं हैं जिनकी वार्षिक आय 01 लाख रुपये से अधिक है। इसके अंतर्गत महिलाओं ने खाली पड़ी जमीनों पर उन्नत किस्म की सब्जियाँ उगाना शुरू किया, उन्नत नस्ल के पशु और वैज्ञानिक तरीके से देखरेख करना, गाँव में उन महिलाओं का समूह बनाया गया जो अन्य महिलाओं को भी आर्थिक नियोजन सिखाती हैं। बालोद जिले के औराटोला जैसे गाँवों की प्रेरणा लेकर यहाँ तीन महिलाओं की काल्पनिक लेकिन यथार्थवादी सफलता की कहानियाँ दर्शाती हैं कि कैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करके महिलाएँ ’लखपति दीदी’ बन रही हैं।
कुमेश्वरी मसिया ने बताया कि उसने प्रेरणा स्वयं सहायता समूह से जुड़कर मत्स्य विभाग से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण लिया। उन्होंने समूह के माध्यम से 50 हजार रूपये का ऋण लिया और तालाब की सफाई करवाकर उसमें रोहू और कतला मछलियों के बीज डाले। मछली पालन के साथ-साथ कुमेश्वरी नें पैतृक भूमि 20 डिसमिल में सब्जी बाड़ी का कार्य प्रारंभ किया। मछलीपालन हेतु वर्तमान में मत्स्य विभाग द्वारा उन्हें मछली जाल एवं आईस बाॅक्स प्रदाय किया गया है। परिणाम स्वरूप आज कुमेश्वरी साल में दो बार मछली की खेप बेचती हैं और सब्जी बेचकर एवं खर्च काटकर उनकी वार्षिक शुद्ध आय 01 लाख 17 हजार रूपये तक पहुँच गई है।
बिहान योजना के तहत अटल महिला स्व-सहायता समूह के अध्यक्ष लाकेश्वरी दीदी बताती है कि समूह के 10 सदस्यों ने फाईल पैड बनाने का प्रशिक्षण लिया और सभी सदस्य सहमत होकर बिहान के माध्यम से 01 लाख रूपये बैंक से ऋण लेकर फाईल पैड की एक छोटी यूनिट स्थापित किया और फाईल पैड विक्रय हेतु उन्होंने केवल शहर पर निर्भर रहने के बजाय आसपास के लोकल बुक डिपो, एवं शासकीय कार्यालय में कम कीमत पर फाईल पैड उपलब्ध कराया जा रहा हैं। फाईल पैड अच्छी गुणवत्ता और कम दाम के कारण उनके मांग बढ़ गई इस प्रकार सभी खर्च निकालने पर प्रत्येक माह सभी सदस्य 07 से 08 हजार रूपये आय अर्जित कर रही है।
प्रेरणा स्व-सहायता समूह की लोकेश्वरी साहू ने लखपति दीदी पहल के तहत पशु पालन हेतु ’पशु सखी’ से प्रशिक्षण लिया और बिहान के माध्यम से 01 लाख का ऋण लेकर दो उन्नत नस्ल की जर्सी गायें खरीदीं। उन्होंने पारंपरिक चारे के बजाय ’अजोला’ और संतुलित पशु आहार का उपयोग शुरू किया। पशु पालन के साथ-साथ लोकेश्वरी ने आरसेटी के माध्यम से सिलाई मशीन का प्रशिक्षण लेकर सिलाई कार्य प्रारंभ की एवं मशरूम उत्पादन हेतु लोकेश्वरी दीदी ने कृषि विज्ञान केन्द्र अरौद से मशरूम का प्रशिक्षण प्राप्त कर मशरूम उत्पादन प्रारंभ किया प्रति दिन 10-15 कि.ग्रा. मशरूम उत्पादन कर 200 रू. प्रति कि.ग्रा. की दर से लोकल बाजार, सी.एल.एफ. मीटिंग एवं स्कूल, जनपद एवं जिला कार्यालय एवं अन्य विभागों में जाकर विक्रय कर रही है। लोकेश्वरी साहू बताती है कि वह केवल दूध बेचना ही नहीं बल्कि बचे हुए दूध से खोवा और पनीर बनाना भी सीखा, जिससे मुनाफा दोगुना हो गया। परिणाम स्वरूप दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री, सिलाई कार्य एवं मशरूम से उनकी मासिक आय 11 हजार रूपये से ऊपर हो गई। जिससे वे साल भर में एवं अन्य कृषि कार्यो से 02 लाख 60 हजार रूपये से अधिक कमा रही हैं।
        जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री सुनील कुमार चंद्रवंशी ने बताया कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के मंशानुरूप एवं उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन तथा कलेक्टर श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा के निर्देशन में बिहान टीम के साथ इस लखपति पहल की मुहिम को जिले में पूरी सक्रियता से आगे बढ़ाया जा रहा है। इससे मुख्यतः संभावित लखपति दीदी के वर्तमान आय, आंकलन एवं अभिसरण के माध्यम से आवश्यक वित्तीय एवं तकनीकी हस्तक्षेप पर फोकस किया गया है। प्रत्येक परिवार हेतु कार्य योजना तैयार कर माइक्रो लेवल पर इसके क्रियान्वयन एवं मैन्युुअल तथा डिजिटल माॅनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित् की गई है। अभी तक जिले में 26 हजार लक्ष्य के विरूद्ध 20 हजार 982 दीदीयों को लखपति श्रेणी में लाया जा चुका है। शेष को जनवरी से मार्च तक के चैथे क्वार्टर की डिजिटल आजीविका रजिस्टर की एंट्री अप्रैल में होनी है लक्ष्य पूर्ण कर लिया जाएगा। लखपति दीदी पहल के क्रियान्वयन में इस विषय पर विशेष ध्यान दिया गया है कि उनके वर्तमान आय स्त्रोत को ही विकसित कर दो से तीन गतिविधियों से जोड़कर आय में बढ़ोतरी किया जाना है। इसी क्रम में बालोद जिले में विकासखंड डौंडी के ग्राम औराटोला के कुल 65 परिवार 06 स्व-सहायता समूह के 65 सदस्य लखपति दीदी बनी है। उक्तानुसार प्राप्त ग्राम सभा के प्रस्ताव अनुसार ग्राम औराटोला को लखपति ग्राम बनाई गई है। इसी प्रकार जिले के अन्य विकासखंड में लखपति ग्राम बनाने की कार्यवाही की जा रही है। राज्य कार्यालय से तकनीकी सलाहकार एजेंसी ट्रीप टीम द्वारा भौतिक सत्यापन कर लिया गया है यथाशीघ्र राज्य स्तर से भी ग्राम औराटोला को लखपति ग्राम घोषित करने कार्यवाही की जाएगी।
        लखपति ग्राम केवल एक आर्थिक आंकड़ा नहीं है बल्कि यह ग्रामीण भारत के आत्मविश्वास का प्रतीक है। औराटोला की सफलता यह सिखाती है कि कौशल विकास ही असली ताकत है। सरकारी योजनाओं जैसे लखपति दीदी और बिहान का सही समय पर लाभ उठाना विकास की कुंजी है। परिवार के सदस्यों का सहयोग और महिलाओं का नेतृत्व ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदल सकता है। यह गाँव अब केवल बालोद जिले के लिए ही नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के लिए एक रोल मॉडल बन चुका है। अन्य ग्राम पंचायतों की महिलाएं और ग्रामीण अब औराटोला का भ्रमण कर यहाँ के मॉडल्स को समझने आ रहे है

08 Apr 2026 01:59PM,
by: Mahak Qureshi
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रायपुर , 8 अप्रैल 2026/ जिन हाथों ने कभी बंदूक थामकर हिंसा की मार्ग अपनाया  था, अब वहीं हाथ अपने हुनर का कमाल दिखा रहे हैं। भानुप्रतापपुर के पास ग्राम चौगेल के पुनर्वास केन्द्र में प्रशिक्षण प्राप्त आत्मसमर्पित नक्सलियों द्वारा हुनर दिखाते हुए काष्ठ कला से नेम प्लेट, छत्तीसगढ़ शासन का ‘लोगो’, ग्राम पंचायतों के लिए बोर्ड, बच्चों के लिए की-रिंग सहित अन्य सजावटी सामग्री तैयार की जा रही है, साथ ही कपड़े का थैला, कार्यालयों के लिए बस्ता भी तैयार किया जा रहा है। सरकार द्वारा घोषित नक्सल पुनर्वास नीति के तहत कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर के मार्गदर्शन में जिला प्रशासन कांकेर द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों को कुशल और दक्ष बनाने का सार्थक प्रयास किया जा रहा है। यहां पर उन्हें काष्ठशिल्प के साथ ही इलेक्ट्रिशियन, ड्रायविंग, सिलाई, राजमिस्त्री जैसे पाठ्यक्रमों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। कभी नक्सली गतिविधियों में संलिप्त रहे युवक-युवतियॉ अब विभिन्न व्यवसाय में दक्ष हो रहे हैं, ताकि वे समाज की मुख्यधारा में शामिल होने के बाद आजीविकामूलक गतिविधियों से जुड़कर सम्मानपूर्वक जीवन निर्वाह कर सकें।
*चौगेल कैंप बना कौशल प्रशिक्षण केंद्र*
वर्षों से लाल आतंक के साए में हिंसा का दंश झेल रहा बस्तर संभाग अब विकास की ओर आगे बढ़ रहा है। शासन द्वारा नक्सल मुक्त बस्तर घोषित किया जा चुका है। हिंसा की राह त्यागकर मुख्यधारा में लौटे नक्सलियों को सरकार कौशल विकास का प्रशिक्षण दे रही है, ताकि वे सम्मानजनक जीवन व्यतीत कर सकें। आत्मसमर्पित नक्सलियों को पुनर्वास नीति-2025 के अंतर्गत भानुप्रतापपुर विकासखंड के पास ग्राम चौगेल (मुल्ला) कैम्प में विभिन्न सृजनात्मक और रोजगारमूलक गतिविधियों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कभी बीएसएफ का कैम्प रहा चौगेल (मुल्ला) का यह कैम्प अब हुनर सिखाने वाला गढ़ बन चुका है। यहां पर जिला प्रशासन द्वारा मुख्यधारा में लौटे 40 आत्मसमर्पित माओवादियों को अलग-अलग पाठयक्रमों जैसे- काष्ठ शिल्प, इलेक्ट्रिशियन, सिलाई, ड्राइविंग, राजमिस्त्री इत्यादि का प्रशिक्षण दिया जा रहा है, साथ ही उनकी शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दी जा रही है। पढ़ने के लिए पाठ्य सामग्री, पुस्तकें, पेन-पेंसिल दिए गए हैं तथा पढ़ाने के लिए योग्य शिक्षकों की व्यवस्था भी की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा आत्मसमर्पित नक्सलियों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण कर आवश्यकतानुसार दवाईयां भी दी जाती हैं। कैम्प में मनोरंजनात्मक गतिविधियां जैसे कैरम, वाद्य यंत्र, विभिन्न प्रकार के खेल भी आयोजित किया जाता है। चौगेल पुनर्वास केंद्र में राजमिस्त्री, इलेक्ट्रिशियन, वाहन चालक के साथ ही कांकेर में घुड़सवारी का भी प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वर्तमान में सिलाई मशीन, काष्ठ शिल्प एवं असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। स्वरोजगार के लिए सशक्त बनाने हेतु कृषि विभाग, मत्स्य पालन विभाग, उद्यानिकी, पशुधन विकास विभाग के साथ ‘बिहान’ के द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन भी किया गया है।
*प्रशिक्षण उपरांत नियोजन करने वाला पहला जिला बना कांकेर*
पुनर्वास केंद्र में प्रशिक्षण उपरांत नक्सली पीड़ित एवं आत्मसमर्पित नक्सलियों को रोजगार से जोड़ने वाला कांकेर पहला जिला बन चुका है। कलेक्टर श्री निलेशकुमार महादेव क्षीरसागर ने अपने हाथों से तीन नक्सली पीड़ित और एक आत्मसमर्पित नक्सली को निजी क्षेत्र में नौकरी के लिए नियुक्ति पत्र सौंपा, इनमें पुनर्वासित सगनूराम आंचला एवं नक्सल पीड़ित रोशन नेताम, बीरसिंह मंडावी और संजय नेताम शामिल थे। इन सभी को निजी फर्म का नियुक्ति पत्र प्रदान किया गया, जहां उन्हें 15 हजार रूपए प्रतिमाह मानदेय और अन्य प्रकार की वित्तीय सुविधाएं प्राप्त होंगी। इन्होंने चौगेल कैम्प में असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन का प्रशिक्षण प्राप्त किया था तथा उन्हें निजी क्षेत्र में नियोजित किया गया है। मुख्यधारा में लौटकर प्रशिक्षण के उपरांत रोजगार प्रदान करने के मामले में उत्तर बस्तर कांकेर पहला जिला है। निजी क्षेत्र में नौकरी मिलने पर खुशी व्यक्त करते हुए माओवाद पीड़ित श्री बीरसिंह मंडावी ने कहा कि ग्राम मुल्ला (चौगेल) के कैम्प में पुनर्जीवन मिला है, जहां निःशुल्क प्रशिक्षण देकर उन्हें कुशल एवं पारंगत बनाया गया, वहीं प्रशिक्षण के बाद जिला प्रशासन द्वारा रोजगार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।

08 Apr 2026 12:50PM,
by: Mahak Qureshi
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रायपुर, 08 अप्रैल 2026/* मुख्य सचिव श्री विकासशील ने राज्य शासन के सभी विभाग के प्रमुख अधिकारियों से कहा है कि वे मिशन कर्मयोगी के अंतर्गत आई-गॉट ट्रेनिंग कार्यक्रम से अपने विभाग को अनिवार्य रूप से ऑन-बोर्ड कर लें। उन्होंने कहा कि सभी विभाग ऑन-बोर्ड हो जाये मुख्य सचिव ने सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को भी अपने मोबाईल से ऑन-बोर्ड होने को कहा है। राज्य शासन के सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारियों को उनकी आवश्यकता अनुसार विभागीय स्किल डेवलपमेंट के लिए प्रशिक्षित किया जा सकेगा। मुख्य सचिव ने सभी विभाग प्रमुखों से कहा है कि वे अपने-अपने विभाग की आवश्यकता अनुसार अधिकारी-कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कोर्स तय कर लें, जिससे उन्हे प्रशिक्षित किया जा सके। आज आई-गॉट प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत साधना सप्ताह के मौके पर सभी विभागों के अधिकारी-कर्मचारी को कर्मयोगी मिशन के तहत प्रशिक्षण हेतु कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में राज्य शासन के विभागों के प्रमुख अधिकारी सहित विभागीय सचिव, संयुक्त सचिव, उप सचिव, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम में सभी जिलों के प्रमुख अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए शामिल हुए।    आई-गॉट में सभी विभागों को ऑन-बोर्ड होना जरूरी: मुख्य सचिव

08 Apr 2026 11:38AM,
by: Mahak Qureshi
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रायपुर, 07 अप्रैल 2026/छत्तीसगढ़ में रासायनिक उर्वरकों की कालाबाजारी करने वालों पर अब सख्त कार्रवाई तय है। कृषि मंत्री श्री रामविचार नेताम ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि खाद की जमाखोरी या अधिक मूल्य पर बिक्री करने वालों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं गड़बड़ी पाए जाने पर सीधे जेल भी भेजे जाएंगे। उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया संकट के कारण रासायनिक उर्वरकों की कमी की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार पूरी तरह सजग है। खाद की कमी नहीं होगी। इसके साथ ही किसानों को जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आपूर्ति और बेहतर होगी, इसलिए किसानों को किसी भी प्रकार से घबराहट या पैनिक होने की आवश्यकता नहीं है। कृषि मंत्री श्री नेताम ने आज इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय परिसर स्थित समेति कक्ष में रायपुर और दुर्ग संभाग के अधिकारियों की आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान इस आशय के वक्तव्य दिए। रासायनिक खाद की कालाबाजारी करने वाले जेल जाएंगे

08 Apr 2026 06:03AM,
by: Mahak Qureshi
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रायपुर, 7 अप्रैल 2026/ सरकार की “एक जिला एक उत्पाद” योजना अब धरातल पर किसानों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसी क्रम में बालोद जिले के गुण्डरदेही विकासखंड अंतर्गत ग्राम बघमरा के युवा प्रगतिशील किसान श्री आकाश चंद्राकर ने अदरक की खेती के माध्यम से सफलता की एक नई मिसाल प्रस्तुत की है।
पारंपरिक फसलों से आगे बढ़ते हुए आकाश चंद्राकर ने “एक जिला एक उत्पाद” योजना से प्रेरित होकर अपने लगभग ढाई एकड़ खेत में अदरक की खेती की शुरुआत की। वैज्ञानिक पद्धतियों और बेहतर प्रबंधन के साथ की गई इस खेती से उन्हें उत्कृष्ट उत्पादन प्राप्त हुआ। साथ ही बाजार में अदरक की अच्छी मांग के कारण उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिला, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। एक जिला एक उत्पाद योजना से बदली तस्वीर

08 Apr 2026 06:03AM,
by: Mahak Qureshi