रायपुर

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आंध्र प्रदेश की विधानसभा और लोकसभा सीटों के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के उम्मीदवारों की घोषणा ने न केवल पार्टी बल्कि उसके सहयोगियों, तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) और जन सेना को भी परेशान कर दिया है। भाजपा की चयन प्रक्रिया में वफादारों की जगह दलबदलुओं को तरजीह दी गई, जिससे वरिष्ठ नेताओं में असंतोष फैल गया है। छह लोकसभा उम्मीदवारों में से केवल एक की वास्तविक भाजपा पृष्ठभूमि है, अन्य हाल ही में दलबदलू हैं। इस कदम ने लंबे समय से पुराने भाजपा सदस्यों को किनारे कर दिया है, जिससे आंतरिक असंतोष पैदा हो गया है। गठबंधन में कलह भी फैल गई है, कुछ सदस्य सीट आवंटन से असंतोष के कारण स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने पर विचार कर रहे हैं। भाजपा उम्मीदवारों की सूची से आंध्र में अशांति

29 Mar 2024 05:24AM,
by: Babuaa Desk
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किसी भी चुनाव में जीत और हार के लिए एक वोट का अंतर ही काफी है लेकिन 25लाख वोट के संसदीय क्षेत्र में कई प्रत्याशी ऐसी बढ़त लेते है कि लगता है जनमत एकतरफा चला गया है। दूसरी तरफ सांस रोक देने वाले नतीजे भी आते है जब एक एक ईवीएम से प्रत्याशी आगे पीछे होते है।विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के चुनावी इतिहास में सबसे अधिक मतों से जीत हासिल करने का रिकॉर्ड के सी पाटिल के नाम दर्ज हैं तो सबसे कम वोट से विजय प्राप्त कर लोकसभा पहुंचने का सौभाग्य भारतीय जनता पार्टी के सोम मरांडी और कांग्रेस के कोंथाला रामकृष्ण को मिला है।देश में हुए सोलह आम चुनावों में से 1952से 2014 तक हुए 16लोकसभा चुनाव के प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 2019में के सी पाटिल ने लोक सभा सीट नवसारी से 6.89मतों से जीत दर्ज की थी।भाजपा के सोम मरांडी के नाम 1998 के चुनाव में बिहार के राजमहल संसदीय क्षेत्र से सबसे कम मात्र नौ मतों से जीत हासिल करने का रिकॉर्ड दर्ज है। इसके अलावा 1989 के आम चुनाव में आंध्र प्रदेश के अनकापल्ली संसदीय सीट से कांग्रेस के कोंथाला रामाकृष्ण ने भी नौ मतों के अंतर से विजय पाई थी। लोकसभा चुनाव सबसे अधिक और कम मतों से जीतने वाले सांसद

28 Mar 2024 11:24AM,
by: Babuaa Desk