सत्य की जीत,बनाम जी पी सिंह की बहाली
लेखक- संजय दुबे

यदि कोई व्यक्ति जिला न्यायालय,राज्य के उच्च या देश के सर्वोच्च न्यायालय से निर्दोष साबित होता है इसका एक ही अर्थ निकलता है कि अभियोजन पक्ष के पास सबूत नहीं थे। सरकारी कर्मचारी के लिए उनके उच्च अधिकारी साजिश रचते है और अपने अहंकार की संतुष्टि पूर्ण कर विभाग में संदेश देते है कि देख लो। दरअसल उच्च अधिकारी अपने गलत कार्यों को पूरा करने के लिए मातहत अधिकारियों पर अनैतिक दबाव बनाते है या उनकी बाते न मानने पर जबरिया ऐसे षडयंत्र रचते है जिससे सरकारी कर्मचारी कानूनी दांवपेच में उलझते है,केरियर तबाह होता है,सामाजिक प्रतिष्ठा अलग खराब होती है। मैं स्वयं ऐसे षड्यंत्रों का शिकार हूं इस कारण जी पी सिंह के साथ हुए षडयंत्र की कड़ी निंदा करता हूं और उच्च अधिकारियो को सचेत करता हूं कि वे अपनी महत्वाकांक्षा को पूरा करने या विधायिका को खुश करने के लिए गलत काम न करे।
जी पी सिंह के साथ कांग्रेस शासनकाल में क्यों षडयंत्र रचा गया ये किसी से छिपा नहीं है। उनसे नियम विपरीत कार्य करने के लिए दबाव। बनाया गया।वे नहीं माने तो मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारियों ने पुलिस विभाग के उच्च अधिकारियों को सुपारी दी।
विधायिका की नजर में चढ़ने के लिए जी पी सिंह के खिलाफ पूरा फर्जी मामला बनाया गया। राजद्रोह का मामला बना दिया गया। अनुपातहीन संपत्ति का पूरा गलत खाका तैयार कर नियमाविपरित जब्ती बनाई गई। एक शासकीय अधिकारी के मूलभूत अधिकार का खुले आम उल्लंघन किया गया।
विधायिका सहित उच्च कार्यपालिक अधिकारी अपनी सारी हद पारकर जी पी सिंह के विरुद्ध ये सोच कर लगे थे कि कांग्रेस की सरकार वापस आएगी। दस साल में जी पी सिंह कहां तक लड़ेंगे ,देखा जाएगा। व्यवस्थापिका और कार्यपालिका के दंभी प्रतिनिधि, न्यायालय में गए मुद्दे पर ये बोल कर बचते है कि न्याय पालिका पर भरोसा करना चाहिए। जब खुद फंसते है तो ये डायलॉग धरे के धरे रह जाता है। जी पी सिंह को चाहिए कि उनके विरुद्ध नियमों को ताक में रखकर कार्य करने वाले सभी पुलिस अधिकारियो के खिलाफ मानहानि का मुकद्दमा दायर करना चाहिए। न्यायालय सरकारी अधिकारी के सद्भावना पूर्ण कार्य को संरक्षण देता है,दुर्भावना पूर्वक कार्यों के लिए।
जी पी सिंह,शीघ्र ही अपनी आई पी एस चयन को सिद्ध करेंगे और जितना भी कार्यकाल बचा है उसमें लोगों के लिए मिसाल बनेंगे कि हर शोषण के खिलाफ संघर्ष करे और दंभी अधिकारियों को सड़क पर खड़ा कर दे

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