तमिलनाडु : एम.के. स्टालिन का आरोप, हिंदी के दबाव में प्राचीन भाषाएं संकट में

feature-top

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने एक बार फिर 'हिंदी थोपने' के मुद्दे को उठाते हुए क्षेत्रीय भाषाओं को नुकसान पहुंचाने के लिए हिंदी के बढ़ावे की आलोचना की है। उन्होंने बिहार और उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि हिंदी के प्रभुत्व के कारण वहाँ की प्राचीन मातृभाषाएँ "संघर्ष कर रही हैं।

स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा, एकरूप हिंदी पहचान को बढ़ावा देना ही प्राचीन मातृभाषाओं को खत्म करता है। उत्तर प्रदेश और बिहार केवल 'हिंदी हार्टलैंड' नहीं थे।

उन्होंने भोजपुरी, मैथिली, अवधी, ब्रज, बुंदेली सहित 19 से अधिक भाषाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि ये सभी अस्तित्व के संकट से जूझ रही हैं। स्टालिन की पोस्ट में लिखा था, "क्या आपने कभी सोचा है कि हिंदी ने कितनी भारतीय भाषाओं को निगल लिया है? भोजपुरी, मैथिली, अवधी, ब्रज, बुंदेली, गढ़वाली, कुमाऊनी, मगही, मारवाड़ी, मालवी, छत्तीसगढ़ी, संथाली, अंगिका, हो, खड़िया, खोरठा, कुर्माली, कुरुख, मुंडारी और कई अन्य भाषाएं आज संकट में हैं।"


feature-top