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छत्तीसगढ़ में RTE आदेशों की अनदेखी, संचालनालय हुआ सख्त
प्रदेशभर के जिला शिक्षा अधिकारियों (DEO) और मॉडल शिक्षकों द्वारा लोक शिक्षण संचालनालय के आदेशों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है
RTE (निःशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिकार अधिनियम) के अंतर्गत निजी स्कूलों में आरक्षित सीटों की जानकारी मांगे जाने के बावजूद अब तक किसी भी जिले से संतोषजनक जानकारी नहीं भेजी गई है।
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा पहले भी पत्र जारी कर समस्त DEO से यह विवरण मांगा गया था कि जिले में कितने निजी विद्यालय पंजीकृत हैं, नोडल अधिकारियों द्वारा कितने स्कूलों की सत्यापन प्रक्रिया पूर्ण की गई है, DEO द्वारा स्वीकृत और निरस्त विद्यालयों की संख्या क्या है। परंतु 33 जिलों के प्रभारी DEO इस दिशा में लापरवाह बने हुए हैं।
अब संचालनालय ने अंतिम रिमाइंडर आदेश जारी करते हुए सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र जानकारी प्रस्तुत नहीं की गई, तो संबंधित DEO के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस मामले को लेकर शिक्षाविदों और पालक संघों ने भी नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि "जानकारी न देने के पीछे कहीं न कहीं घोटालों के उजागर होने का डर छुपा है।
यदि पूरी पारदर्शिता से जानकारी सामने आए तो कई अनियमितताओं का पर्दाफाश हो सकता है।" RTE जैसे महत्वपूर्ण कानून की अवहेलना न सिर्फ बच्चों के अधिकारों का हनन है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि अंतिम चेतावनी के बाद DEO हरकत में आते हैं या कार्रवाई की गाज गिरती है।
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