महिला सशक्तिकरण है राष्ट्र की प्रगति का आधार : डॉ. मोहन भागवत

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने  महिलाओं के सशक्तिकरण को लेकर एक महत्वपूर्ण और विचारोत्तेजक बयान दिया। उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति तब तक अधूरी है, जब तक समाज की आधी आबादी को रूढ़िवादी रीति-रिवाजों और परंपराओं से मुक्ति नहीं दी जाती।

डॉ. भागवत ने कहा एक पुरुष जीवन भर काम करता है, लेकिन एक महिला न केवल जीवनपर्यंत कार्यरत रहती है, बल्कि वह आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देती है। एक महिला के प्रेम, त्याग और स्नेह में ही बच्चों का विकास होता है। वह परिवार और समाज दोनों के लिए आधारस्तंभ होती है। उन्होंने पुरुषों द्वारा महिलाओं के ‘उत्थान’ की सोच को खारिज करते हुए कहा कि यह एक प्रकार का अहंकार और मूर्खता है।

उन्होंने कहा “महिलाएं स्वयं सक्षम हैं। उन्हें जो करना है, वह करने दें। हमारा कार्य उन्हें सशक्त बनाना और अवसर देना होना चाहिए, न कि उनके लिए फैसले लेना। आरएसएस प्रमुख ने यह भी कहा कि जब कोई महिला अपने आप को सशक्त करती है, तो वह केवल खुद नहीं, बल्कि पूरे समाज को ऊपर उठाती है।

उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास में महिलाओं की भूमिका अनिवार्य और अत्यंत महत्वपूर्ण है।


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