छत्तीसगढ़ : कैग ने सरकार पर खड़े किए गंभीर सवाल

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छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र में  नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट सदन में प्रस्तुत हुई इस रिपोर्ट ने राज्य शासन की कई योजनाओं और परियोजनाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

सबसे पहले राजधानी रायपुर के चर्चित और लंबे समय से विवादों में घिरे स्काई वॉक को लेकर सीएजी ने सख्त टिप्पणियां की हैं। रिपोर्ट के अनुसार, इस परियोजना को शासन द्वारा बिना प्रशासनिक और तकनीकी स्वीकृति के जल्दबाज़ी में शुरू किया गया।

कंसल्टेंट द्वारा टेंडर की पहली प्रक्रिया पूरी किए बिना कार्यादेश जारी कर दिया गया, जिससे निर्माण कार्य बाधित हुआ और परियोजना अधूरी रह गई। इसके अलावा ड्राइंग और डिजाइन में बार-बार संशोधन के चलते लागत में भारी बढ़ोतरी हुई, जिससे ना सिर्फ देरी हुई बल्कि यह योजना फिजूलखर्ची का प्रतीक बनकर रह गई।

सीएजी रिपोर्ट में राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड की उपभोक्ता बिलिंग और संग्रहण प्रणाली की अनुपालन लेखा परीक्षा में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2017-18 से 2021-22 के बीच 9283.38 मिलियन यूनिट ऊर्जा वितरण के दौरान नष्ट हो गई, जिससे कंपनी को लगभग ₹2157.15 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ।

सीएजी ने छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण की भी समीक्षा की। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2014 से 2023 के दौरान 7.27 लाख युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य था, परंतु केवल 4.70 लाख (65%) प्रशिक्षुओं को ही प्रमाणन मिल सका। प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना में भी लक्ष्य के मुकाबले प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा 17,504 के लक्ष्य के विरुद्ध केवल 8,481 (48%) प्रशिक्षु परीक्षा में उत्तीर्ण हो पाए, जिनमें से 3,312 (39%) को कोई रोजगार नहीं मिल सका।

सबसे गंभीर बात यह रही कि नौ वर्षों बाद भी कई प्रमाणपत्रों को मान्यता नहीं मिल सकी, जिससे प्रशिक्षुओं को रोजगार और आजीविका से वंचित होना पड़ा।

सीएजी ने अरपा-भैंसाझार जल परियोजना को लेकर भी टिप्पणी की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस परियोजना को बिना वन एवं पर्यावरण स्वीकृति, अंतरराज्यीय सहमति और केंद्रीय जल आयोग की डीपीआर मंजूरी के शुरू कर दिया गया, जिसके चलते परियोजना की लागत और कार्यदायरे में बार-बार बदलाव करना पड़ा।


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