बिहार में चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है। इसके तहत आम नागरिकों से उनके पहचान व निवास से जुड़े प्रमाणपत्र मांगे जा रहे हैं।

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बिहार में चुनाव आयोग द्वारा जारी मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को अद्यतन करना है। इसके तहत आम नागरिकों से उनके पहचान व निवास से जुड़े प्रमाणपत्र मांगे जा रहे हैं।

लेकिन इस प्रक्रिया की विश्वसनीयता उस समय सवालों के घेरे में आ गई, जब एक कुत्ते का ‘डॉग बाबू’ के नाम पर आवासीय प्रमाणपत्र जारी कर दिया गया। इस प्रमाणपत्र में न केवल कुत्ते का 'डॉग बाबू' का नाम दर्ज किया, बल्कि कुत्ते की वास्तविक फोटो, पता और पिता का नाम पर कुत्ता बाबु और मां का नाम कुतिया देवी भी दर्ज किया गया है।

इस मामले ने चुनाव आयोग की चुनावी सत्यापन प्रणाली पर मांगे जा रहे दस्तावेज पर सवाल खड़ा कर दिया है। जहां आम नागरिकों के आधार कार्ड और राशन कार्ड जैसे दस्तावेज़ों को ‘संदेहास्पद’ बताकर खारिज कर दिया गया है, वहीं एक कुत्ते के नाम से आसानी से सरकारी प्रमाणपत्र मिल जाना आश्चर्यजनक है।

प्रशासन ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए आवेदनकर्ता, कंप्यूटर ऑपरेटर और संबंधित अधिकारी के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है ।


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