प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अवैध निर्माण घोटाले से जुड़ी अपनी धन शोधन जाँच के तहत महाराष्ट्र में नए सिरे से छापेमारी शुरू की। वसई-विरार के पूर्व नगर आयुक्त अनिल पवार पर विशेष ध्यान दिया गया। वसई, विरार, नासिक और मुंबई में जिन 12 ठिकानों पर छापेमारी की गई, उनमें उनके आवास और कार्यालय परिसर भी शामिल थे। यह छापेमारी पवार के स्थानांतरण के बाद उनकी आधिकारिक विदाई के ठीक एक दिन बाद हुई है, जिससे उनके कार्यकाल के दौरान अनधिकृत भवन निर्माण की मंज़ूरी दिलाने में उनकी कथित भूमिका को लेकर संदेह गहरा गया है।

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प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अवैध निर्माण घोटाले से जुड़ी अपनी धन शोधन जाँच के तहत महाराष्ट्र में नए सिरे से छापेमारी शुरू की। वसई-विरार के पूर्व नगर आयुक्त अनिल पवार पर विशेष ध्यान दिया गया। वसई, विरार, नासिक और मुंबई में जिन 12 ठिकानों पर छापेमारी की गई, उनमें उनके आवास और कार्यालय परिसर भी शामिल थे। यह छापेमारी पवार के स्थानांतरण के बाद उनकी आधिकारिक विदाई के ठीक एक दिन बाद हुई है, जिससे उनके कार्यकाल के दौरान अनधिकृत भवन निर्माण की मंज़ूरी दिलाने में उनकी कथित भूमिका को लेकर संदेह गहरा गया है।

ईडी की जाँच वसई-विरार नागरिक विकास योजना के तहत सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और डंपिंग ग्राउंड के लिए निर्धारित लगभग 60 एकड़ ज़मीन पर 41 अवैध इमारतों के निर्माण के इर्द-गिर्द घूमती है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कई नगर निगम अधिकारियों ने स्थानीय बिल्डरों के साथ मिलीभगत करके इन निर्माणों को संभव बनाने के लिए जाली दस्तावेज़ों और फर्जी बिक्री समझौतों को मंज़ूरी दी। ये इमारतें मुख्य रूप से कम आय वाले खरीदारों को बेची गईं, जिनमें से कई को कानूनी उल्लंघनों की जानकारी ही नहीं थी।


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