ईडी ने बिहार सरकार को खनन घोटाले की जानकारी दी, नए सिरे से एफआईआर दर्ज करने की मांग करी

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ईडी ने हाल ही में बिहार सरकार के खान एवं भूविज्ञान विभाग को पीएमएलए की धारा 66 के तहत पत्र लिखा है, जो उसे आपराधिक कानून के उल्लंघन के संबंध में कानून प्रवर्तन एजेंसी के साथ जानकारी और साक्ष्य साझा करने की अनुमति देता है।

ऐसा समझा जाता है कि एजेंसी ने पत्र में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना द्वारा तैयार की गई एक भू-स्थानिक रिपोर्ट बिहार सरकार को सौंपी है, जिसमें पाया गया है कि आरोपी कंपनी द्वारा 2016 से 2021 के बीच जिले से 11.99 करोड़ घन मीटर रेत का "अवैध" उत्खनन किया गया था।

सूत्रों के अनुसार, आईआईटी के विशेषज्ञों ने लगभग दो महीने में रिपोर्ट तैयार करने के लिए रिमोट सेंसिंग और इसी तरह की तकनीकों का इस्तेमाल किया और यह भी बताया गया कि कथित अवैध रेत खनन पट्टे के क्षेत्रों से बाहर किया गया था।

ईडी ने अपने पत्र में कहा है कि खनन विभाग की दरों के अनुसार, रेत के इस कथित अवैध उत्खनन से राज्य सरकार को लगभग ₹131,43,20,058 (131 करोड़) के राजस्व का नुकसान हुआ।

एजेंसी ने राज्य पुलिस से धोखाधड़ी, जालसाजी, आपराधिक षड्यंत्र और संबंधित खनन एवं पर्यावरण कानूनों से संबंधित आईपीसी/बीएनएस की विभिन्न धाराओं के तहत एक नई प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है ताकि आरोपियों पर संबंधित आपराधिक कानूनों के तहत मुकदमा चलाया जा सके।

सूत्रों ने कहा कि आरोपियों और उनसे जुड़े अन्य लोगों के धन के लेन-देन के विश्लेषण से कुछ राजनेताओं की संभावित संलिप्तता का संकेत मिलता है।


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