गायक नहीं नायक भी थे किशोर कुमार
सजंय दुबे
अभिनय में मुझे धोखा मिला है। हालात और दबाव के चलते मै अभिनय किया था-ये आभास कुमार गांगुली ने अभिनय छोड़ने के समय कहा था। इसके बावजूद एक दशक तक आभास कुमार गांगुली याने किशोर कुमार अभिनय करते रहे।गंभीर रूप से अभिनय करना किशोर कुमार के बस की बात नहीं थी बावजूद उन्होंने ऐसे रोल भी किया।
अपने भीतर के हास्य को जाना तो विदूषक को ही नायकत्व में बदल दिया। फिल्म उद्योग में किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार स्थापित नायकों में से एक थे। किशोर कुमार के लिए अन्य की तुलना में ज्यादा सुविधापूर्ण जगह पर थे। फिल्म उद्योग में इसके चलते उन्हें मौका भी मिल सकता था, मिला भी लेकिन दमखम न हो तो बड़े बड़े स्टार के कलाकार के रिश्तेदार तेल ले लेते है।
किशोर कुमार ने 1946से 1956तक शिकारी,आंदोलन, नौकरी, बाप रे बाप, नया अंदाज, भागम भाग, भाई भाई, आशा फिल्म में नायक बनकर फिल्मों में आते रहे। कुछ फिल्मों में वे कॉमेडियन की भूमिका में पारंगत रहे। चलती का नाम गाड़ी, डा एक्स इन बॉम्बे , प्यार किए जा, पड़ोसन, जैसी हास्य प्रधान फिल्मों में काम करके ये सिद्ध कर दिया था कि उनमें खिलंदडापन ज्यादा है। अगर आपने पड़ोसन फिल्म देखी होगी तो किशोर कुमार, महमूद पर भारी पड़ गए थे।
महमूद स्वयं मानते थे कि हास्य के मामले में किशोर कुमार गुरु है। नायकी के साथ साथ गायकी में उनका जमाना देव आनंद के साथ शुरू हुआ, राजेश खन्ना, जितेंद्र, अमिताभ बच्चन के लिए वे शानदार पार्श्व गायक रहे। राजेश खन्ना के 92फिल्मों के लिए 245गाने गाए। जितेन्द्र के लिए 202 अमिताभ बच्चन के लिए 131,देवानंद के लिए 119गाने गाए। वैसे किशोर कुमार मूडी थे।आपातकाल के दौरान तत्कालीन सूचना प्रसारण मंत्री विद्या चरण शुक्ल ने किशोर कुमार को बीस सूत्रीय कार्यकम के लिए ज़िंजल गाने के लिए दबाव डाला।
किशोर कुमार ने साफ मना कर दिया। 4मई 1976से आपातकाल खत्म होने तक किशोर कुमार रेडियो से बाहर रहे। ये उस किशोर कुमार की बात है जिसने समझौता नहीं किया
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