बिना मान्यता के नर्सरी स्कूलों पर छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट सख्त

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छत्तीसगढ़ में बिना मान्यता के चल रहे नर्सरी स्कूलों के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। कांग्रेस नेता विकास तिवारी की जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने शिक्षा विभाग को फटकार लगाते हुए कहा, "क्या अब पान दुकान वाला भी नर्सरी स्कूल खोलेगा?"

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2013 से ही नर्सरी कक्षाओं के लिए मान्यता लेना अनिवार्य था, लेकिन स्कूलों ने बिना किसी वैध अनुमति के पिछले 12 वर्षों से संचालन जारी रखा है। कोर्ट ने कहा कि यह गंभीर आपराधिक कृत्य है और ऐसे स्कूलों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

चीफ जस्टिस ने कहा, "आप लोग बड़े स्कूल संचालकों को बचाने के लिए कमेटियां बनाते हैं और जल्दबाज़ी में शपथ पत्र दाखिल कर देते हैं। बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। जिन स्कूलों ने गैरकानूनी रूप से संचालन किया है, उनके खिलाफ न सिर्फ कार्रवाई की जाए बल्कि प्रभावित बच्चों को 5-5 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाए। सुनवाई के दौरान शिक्षा विभाग के सचिव अवकाश पर थे, इसलिए संयुक्त सचिव ने अदालत में पांच सदस्यीय कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर दाखिल शपथ पत्र में बताया कि नर्सरी शालाओं की मान्यता संबंधी अधिनियम को समाप्त करने का प्रस्ताव है।

इस पर कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई और कहा कि "जो भी नियमों में बदलाव किया जाएगा, वह भविष्य की तारीख से लागू होगा, न कि पूर्ववर्ती वर्षों से। विकास तिवारी ने याचिका में आरोप लगाया था कि राज्य में कई निजी स्कूल एक ही नाम या मिलते-जुलते नामों से अलग-अलग ब्रांच खोलकर नियमों की अनदेखी कर रहे हैं।

उन्होंने विशेष रूप से कृष्णा पब्लिक स्कूल पर आरोप लगाया कि उसने आरटीई के तहत हज़ारों गरीब बच्चों के शिक्षा के अधिकार को नकारते हुए करोड़ों रुपये की वसूली की और शिकायत करने पर उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवा दी गई।


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