धूर्त की तरह काम नहीं कर सकते, कानून के दायरे में रहिए : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए कड़ी फटकार लगाई। कोर्ट ने साफ कहा कि ईडी किसी धूर्त की तरह व्यवहार नहीं कर सकता और उसे कानून के दायरे में रहकर काम करना होगा।

जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्ज्वल भुइयां और जस्टिस एनके सिंह की बेंच विजय मदनलाल चौधरी केस से जुड़े पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इस दौरान कोर्ट ने ईडी द्वारा दर्ज किए गए मनी लॉन्ड्रिंग मामलों में दोषसिद्धि की बेहद कम दर 10 फीसदी से भी कम पर गंभीर चिंता जताई।

कोर्ट ने कहा, हम सिर्फ लोगों की स्वतंत्रता को लेकर चिंतित नहीं हैं, बल्कि ईडी की छवि भी हमारे लिए मायने रखती है। अगर पांच-छह साल हिरासत में रखने के बाद आरोपी बरी हो जाते हैं, तो उस नुकसान की भरपाई कौन करेगा? सुनवाई के दौरान एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने दलील दी कि ईसीआईआर की कॉपी देना अनिवार्य नहीं है, और कई अभियुक्त जांच से बचने के लिए केमैन द्वीप जैसी जगहों पर भाग जाते हैं।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस भुइयां ने कहा, “आप खुद को एक बेचारे जांच अधिकारी के रूप में पेश न करें और न ही धूर्त की तरह आचरण करें। कानून के भीतर रहकर कार्य करना आपकी जिम्मेदारी है।


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