प्रचार हित याचिका पर सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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उच्चतम न्यायालय ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया, जिसमें राज्य चुनाव आयोगों को राजनीतिक दलों की कथित अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के निर्देश देने की मांग की गई थी।

याचिका में दावा किया गया था कि ये गतिविधियां ‘देश की संप्रभुता, अखंडता और एकता’ को कमजोर कर सकती हैं। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि यह मामला जनहित से अधिक "प्रचार हित" से जुड़ा हुआ लगता है, इसलिए इस पर सुनवाई नहीं की जा सकती।

बेंच ने टिप्पणी की, "जनहित याचिकाओं के नाम पर हम प्रचार हित याचिकाओं की अनुमति नहीं दे सकते। कोर्ट ने सीधे सर्वोच्च न्यायालय का दरवाज़ा खटखटाने की प्रवृत्ति पर भी नाराज़गी जताई। घनश्याम दयालु उपाध्याय नामक याचिकाकर्ता ने केंद्र और निर्वाचन आयोग के खिलाफ याचिका दायर की थी।

इस पर प्रधान न्यायाधीश ने पूछा, "क्या इसे मुंबई उच्च न्यायालय में नहीं उठाया जा सकता?" बेंच ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए जनहित याचिकाएं आवश्यक हैं, लेकिन यह याचिका केंद्र या निर्वाचन आयोग के नीतिगत मामलों से जुड़ी है और अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सर्वोच्च न्यायालय में आने का औचित्य नहीं बताती।


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