50 साल की हुई फिल्म "शोले"

संजय दुबे

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हम लोग अक्सर फिल्मों में एक डायलॉग अक्सर सुना करते थे" आज से बीस साल पहले की बात है"। आज इसे सुधार कर कहते है "आज से पचास साल पहले की बात है"। जी हां, आज से पचास साल पहले 15अगस्त 1975 को एक ऐसी फिल्म का सिनेमा के पर्दे में आगमन हुआ जिसने भारत में हिंसा को स्थापित कर दिया।"

बुराई पर अच्छाई की जीत" का टैग इस फिल्म में भी लगा था लेकिन बुराई महिमा मंडित हुई थी, पहली बार। इस फिल्म की कहानी रामगढ़ के ठाकुर ( पुलिस इंस्पेक्टर) के परिवार के सामूहिक नर संहार के बाद डाकू गब्बर सिंह से बदला लेने की तथा कथा है । लोहा लोहे का काटता है के सिद्धांत पर दो बुरे आदमी(जय और वीरू) को सुपारी दी जाती है। ये बात अलग है कि काम पूरा होने पर सुपारी राशि मानवता के नाते अस्वीकार कर दी जाती है।

फिल्म ठाकुर, जय, वीरू, गब्बर, बसंती के इर्द गिर्द घूमती है। सहयोगी के रूप में ठाकुर की बहु राधा,राम लाल, कलिया, सांभा, जेलर(जिनका फिल्मी नाम कोई जानता), सुरमा भोपाली, रहीम, धौलिया भी है। इस फिल्म के संवाद सलीम और जावेद की संयुक्त जोड़ी ने लिखा था। तुर्रा ये भी रहा कि भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में पहली बोलती फिल्म आलमआरा से लेकर अब तक रिलीज हुई फिल्मों में केवल शोले के संवाद का रिकॉर्ड प्लेयर जारी हुआ था । प्रथा तो केवल गीतों के रिकॉर्ड प्लेयर का ही था लेकिन शोले के डायलॉग के रिकॉर्ड प्लेयर ने नया इतिहास बनाया।

** “हम काम सिर्फ पैसों के लिए करते हैं” **“हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं”. ** “इतना सन्नाटा क्यों है. **“बसंती इन कुत्तों के सामने मत नाचना” ** “ये हाथ नहीं फांसी का फंदा है” ** “रामगढ़ वालों ने पागल कुत्तों के सामने रोटी डालना बंद कर दिया है। **“सरदार, मैंने आपका नमक खाया है सरदार"। **“ये हाथ हमको देदे ठाकुर!" **.“कितने आदमी थे?” **“यहां से पचास-पचास कोस दूर गांव में, जब बच्चा रोता है, तो मां कहती है बेटा सो जा, सो जा नहीं तो गब्बर सिंह आ जाएगा।," **“जो डर गया समझो मर गया”। **“इसकी सजा मिलेगी…बराबर मिलेगी!”।

**“जब तक तेरे पैर चलेंगे उसकी सांस चलेगी… तेरे पैर रुके तो ये बंदूक चलेगी”। **“बहुत याराना लगता है” **“गब्बर की ताप से तुम्हें एक ही आदमी बचा सकता है… खुद गब्बर”। **“अब तेरा क्या होगा कालिया?”। **“क्या समझ कर आए थे कि सरदार बहुत खुश होगा, शाबाशी देगा?” ** "होली कब है, कब है होली" ** "ये जेम्स बॉन्ड के पोते है" ये शोले के वे मुख्य डायलॉग हैं जो उस जमाने से लोगों के जुबान पर चढ़े थे। इस फिल्म के दोनों नायक नायिका पति-पत्नी थे ।

अमिताभ बच्चन और जया बच्चन, धर्मेंद्र और हेमा मालिनी।इस फिल्म के जय(अमिताभ बच्चन), वीरू(धर्मेंद्र) बसंती(हेमा मालिनी) ,राधा(जया बच्चन) भारतीय संसद में सांसद बन चुके है। भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में शायद ही ऐसी कोई फिल्म होगी जिसके मुख्य चार कलाकार भारतीय संसद में प्रतिनिधि बने हो।

शोले फिल्म को लेकर दो प्रश्न पूछे जाते है पहला रामगढ़ में बिना लाइट के पानी टैंक क्यों बना था। दूसरा जब रहीम चाचा मस्जिद जाते है तो मस्जिद से लाउड स्पीकर में अजान कैसे गूंजती थी ? जबकि ठाकुर की बहु राधा शाम को दिया जलाती थी। इसका उत्तर आपके पास हो तो बताइएगा


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