उत्तर प्रदेश में 'स्कूल पेयरिंग' नीति पर राजनीतिक विवाद

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उत्तर प्रदेश में कम नामांकित स्कूलों के विलय की प्रशासनिक कवायद अब एक राजनीतिक विवाद का रूप ले चुकी है, जिसके कारण विरोध प्रदर्शन, पोस्टर वार, एफआईआर और राज्य विधानसभा में तीखी बहस छिड़ गई है। आदित्यनाथ सरकार द्वारा जून में घोषित "स्कूल पेयरिंग" नीति का उद्देश्य 50 से कम छात्रों वाले 10,000 से ज़्यादा प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्कूलों को, आमतौर पर एक किलोमीटर के दायरे में, आस-पास के संस्थानों में विलय करना है।

अधिकारियों का कहना है कि इस कदम से बुनियादी ढाँचा मज़बूत होगा, पर्याप्त शिक्षक संख्या सुनिश्चित होगी और छात्रों के लिए बड़े सहकर्मी समूह उपलब्ध होंगे, लेकिन विपक्ष इसे सरकारी स्कूलों का "छिपा हुआ बंद" बता रहा है जिससे हाशिए पर रहने वाले और ग्रामीण बच्चे शिक्षा प्रणाली से बाहर हो जाएँगे। पिछले छह हफ़्तों में, यह मुद्दा अदालती जाँच, सरकार द्वारा स्पष्टीकरण की बौछार, कई सड़कों पर विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक कार्यकर्ताओं के ख़िलाफ़ एफआईआर और पोस्टर वार के बावजूद थमने का नाम नहीं ले रहा है।


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