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रामगढ़ पहाड़ी पर मंडरा रहा खतरा, कोल माइंस की ब्लास्टिंग से बढ़ीं दरारें : पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव
सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड में संचालित परसा केते एक्सटेंशन कोल माइंस में हो रही ब्लास्टिंग से रामगढ़ पहाड़ी में दरारें आने और हाल ही में लैंड स्लाइडिंग की घटनाओं को लेकर पूर्व उपमुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव ने गंभीर चिंता जताई। उन्होंने सोमवार को अंबिकापुर के कोठीघर में पत्रकार वार्ता आयोजित कर प्रशासन और सरकार से त्वरित कार्रवाई की मांग की।
सिंहदेव ने कहा कि रामगढ़ पहाड़ी सरगुजा की पहचान और आस्था का केंद्र है। यह लगभग 10 हजार साल पुराना स्थल है और सनातन धर्म के महत्वपूर्ण प्रमाणों का साक्षी है। ऐसे ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों की सुरक्षा के लिए प्रशासन और जनता को मिलकर दबाव बनाना चाहिए।
उन्होंने आरोप लगाया कि कोयला खदान में हो रही ब्लास्टिंग से पहाड़ी में बड़ी-बड़ी दरारें बन रही हैं और कंपन स्थानीय लोग लगातार महसूस कर रहे हैं। यदि दरारें और बढ़ीं तो रामगढ़ पहाड़ी के ऊपर जाने का रास्ता बंद हो सकता है, साथ ही नीचे बसे लोगों के लिए भूस्खलन का खतरा भी बढ़ जाएगा। सिंहदेव ने कहा, “आस्था के इस केंद्र पर खतरे के बादल मंडरा रहे हैं। प्रशासन द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में रामगढ़ पहाड़ी और कोल माइंस के बीच की दूरी गलत बताई गई है, जो चिंताजनक है।”
दूरी 10 किलोमीटर से अधिक हो तो आपत्ति नहीं उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि खदान रामगढ़ पहाड़ी से 10 किलोमीटर से अधिक दूरी पर है तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने इसकी स्वतंत्र जांच और स्थानीय लोगों की मौजूदगी में माप-जोख कराने की मांग की। सिंहदेव ने जानकारी दी कि 20 दिसंबर 2020 को तत्कालीन कलेक्टर द्वारा जारी एनओसी में सीता बेंगरा से कोल माइंस की दूरी 11 किलोमीटर बताई गई थी, जबकि 20 मार्च 2024 के सर्वेक्षण के अनुसार केते एक्सटेंशन के कोना नंबर 3 से यह दूरी सैटेलाइट के अनुसार 10.3 किलोमीटर दर्ज की गई है।
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