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राष्ट्रपति और राज्यपाल के फैसलों को राज्य सरकारें सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दे सकतीं - केंद्रीय सरकार
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में यह दलील दी कि राज्य सरकारें उन फैसलों के खिलाफ याचिका दायर नहीं कर सकतीं, जो राष्ट्रपति या राज्यपाल ने विधानसभा से पारित विधेयकों पर लिए हों। भले ही राज्य यह दावा करें कि ऐसे फैसलों से नागरिकों के मौलिक अधिकारों का हनन हुआ है।
केंद्र की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने यह बात चीफ जस्टिस बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संविधान पीठ के समक्ष कही। इस पीठ में जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस एएस चंदुरकर भी शामिल थे।
मेहता ने कहा कि राष्ट्रपति सुप्रीम कोर्ट से यह राय चाहती हैं कि क्या राज्य सरकारें संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत ऐसी याचिकाएं दाखिल कर सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति यह जानना चाहती हैं कि अनुच्छेद 361 का दायरा क्या है।
संविधान का अनुच्छेद 361 कहता है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल अपने अधिकारों और कर्तव्यों के निर्वहन के दौरान किसी भी अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं होंगे।
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