10% बेड आरक्षण की शर्त पर उठे सवाल, सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र-राज्यों से मांगा जवाब

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सुप्रीम कोर्ट ने उन निजी अस्पतालों पर गंभीर सवाल उठाए हैं, जिन्हें रियायती दर पर जमीन इस शर्त पर दी गई थी कि वे गरीब मरीजों का मुफ्त इलाज करेंगे और उनके लिए 10 प्रतिशत बेड आरक्षित रखेंगे।

कोर्ट ने इस शर्त का पालन न किए जाने के आरोपों पर केंद्र सरकार और सभी राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। प्रधान न्यायाधीश बी.आर. गवई की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने  यह नोटिस जारी किया।

यह कदम मैगसेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडेय की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान उठाया गया। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने दलील दी कि निजी अस्पतालों को सरकार द्वारा रियायती दर पर जमीन दी गई थी, लेकिन इसके बदले तय की गई सामाजिक जिम्मेदारी का पालन वे नहीं कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि ऐसा कोई ठोस आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, जिससे साबित हो कि गरीबों को मुफ्त इलाज और बेड आरक्षण की सुविधा दी जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को गंभीर मानते हुए केंद्र और राज्यों से विस्तृत जवाब तलब किया है।


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