20 व्यक्ति को मरणोपरांत भारत रत्न मिला है,एक और ध्यानचंद के लिए सही
संजय दुबे
हमारे देश में बमुश्किल 12देशों के बीच खेले जाने वाले अंतर्राष्ट्रीय खेल क्रिकेट के भगवान सचिन तेंडुलकर को भारत रत्न सम्मान मिला है। 53भारत रत्नों में सचिन अकेले रत्न है। उनकी उपलब्धि है 200टेस्ट खेलना(182के बाद 18टेस्ट उनको इसलिए खिलाया गया ताकि 200पूरा कर ले, ऑस्ट्रेलिया में होते तो बहुत पहले बाहर कर दिए होते)।खैर, सचिन की उपलब्धि महत्वपूर्ण है।
इस कारण उन्हें सारे कायदे तोड़कर भारत रत्न बना दिया गया। अच्छा हुआ भविष्य में किसी खिलाड़ी के जिंदा रहते या मरने के बाद भारत रत्न मिलने का रास्ता तो खुला। आज 29अगस्त का दिन है। भारतीय हॉकी के भगवान। मेजर ध्यान चंद का जन्म दिन है।1928,1932और 1936 के ओलंपिक खेलो में ध्यानचंद ने भारत को गोल्ड मेडल दिलाया था।
इतने गोल्ड मेडल किसी भी खिलाड़ी ने देश को नहीं दिलाए है। हॉकी, क्रिकेट के समान उंगलियों में गिने जाने देशों का खेल नहीं है। आज की स्थिति में 212देश हॉकी खेलते है। 110देश टी ट्वेंटी खेलते है।20देश वनडे और 12देश टेस्ट खेलते है। साफ है कि क्रिकेट, हॉकी से दुनियां में टेस्ट क्रिकेट बीस गुना पीछे है। नियम से ध्यानचंद को भारत रत्न देने के शुरुआत के साल 1955में ही दे दिया जाना था।उस दौर में खेल उन क्षेत्रों में नहीं आता था जिसमें भारत रत्न दिया जाता था सो ध्यानचंद को नही दिया गया। ध्यान चंद को भारत रत्न देने की मांग उस समय बलवती हुई जब सचिन तेंडुलकर को भारत रत्न बनाने के लिए खेल क्षेत्र को भी जोड़ा गया ।
2014 में सचिन तेंडुलकर भारत रत्न बन गए। ये देश ध्यान चंद के तीन ओलम्पिक गोल्ड के लिए कृतज्ञ होता तो सचिन तेंडुलकर के साथ साथ ध्यान चंद को भी मरणोपरांत भारत रत्न दे देता। देश में मरणोपरांत भारत रत्न देने की परंपरा लाल बहादुर शास्त्री (1966 )के साथ शुरू हुई। अब तक 20 व्यक्ति मरणोपरांत भारत रत्न पा चुके है। लाल बहादुर शास्त्री के अलावा के कामराज, विनोबा भावे,एम जी रामचंद्रन, बी आर अंबेडकर,राजीव गांधी, वल्लभ भाई पटेल, अब्दुल कलाम आजाद, अरुणा आसफ अली, जय प्रकाश नारायण, गोपीनाथ बारदौली,मदन मोहन मालवीय, भूपेन हजारिका, नानाजी देशमुख,कर्पूरी ठाकुर चौधरी चरण सिंह, पी वी नरसिंहाराव, एम एस स्वामीनाथन, को मरणोपरांत भारत रत्न मिला है।
इनमें से कई राज्यों के केवल मुख्यमंत्री रहे है अर्थात उनकी लोकप्रियता ध्यान चंद जैसी नहीं रही। कर्पूरी ठाकुर बिहार के ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री रहे है।क्या ध्यान चंद का योगदान कर्पूरी ठाकुर से कम है?
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