घर का सपना अब मौलिक अधिकार का हिस्सा : सुप्रीम कोर्ट

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जीवनभर की गाढ़ी कमाई लगाकर घर और फ्लैट बुक कराने के बाद अधूरी इमारतों में फंसे हजारों खरीदारों के दर्द को सुप्रीम कोर्ट ने समझा है। शुक्रवार को शीर्ष अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा आवास का अधिकार केवल अनुबंध आधारित अधिकार नहीं है, बल्कि संविधान के तहत मिले जीवन के मौलिक अधिकार का हिस्सा है।

इसलिए अदालत ऐसे निर्देश दे रही है, जिनसे हर नागरिक का घर का सपना पूरा हो और रियल एस्टेट सेक्टर में लोगों का भरोसा कायम रहे। अदालत ने मध्यम वर्ग की पीड़ा को शब्द देते हुए कहा घर के लिए जीवनभर की कमाई लगाने वाला इंसान दोहरा बोझ ढोता है।

एक ओर अधूरे घर की ईएमआई चुकाता है, दूसरी ओर किराया भी देता है। उसका सपना सिर्फ एक छत का है, लेकिन यह सपना अधूरी इमारत में कैद होकर रह जाता है।


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