हिंदी,हिंदू और हिंदुस्तान
संजय दुबे
संविधान निर्माताओं के सामने बड़ी दुविधा थी कि राष्ट्रभाषा के रूप में हिंदी को कैसे स्वीकार करे ? गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक,तमिलनाडु केरल,आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल,उड़ीसा,असम सहित पूर्वोत्तर राज्यों में लिखी और बोली जाने वाली लिपि और भाषा अलग अलग थी।
इसी कारण देश की राष्ट्र भाषा हिंदी नहीं बन सकी। प्रश्न ये भी था कि देश की भीतर की सीमा में कोई दूसरी भाषा भी हो जो दो अलग अलग भाषाई व्यक्तियों के संपर्क के लिए माध्यम बने। हमारे संविधान निर्माताओं को अंतरास्ट्रीय भाषा का महत्व पता था।
अंग्रेजी भाषा विकल्प बनी।समस्या का हल हो गया। बहरहाल हिंदी, राष्ट्रभाषा नहीं बनी तो हिंदुओं का हिंदुस्तान भी नहीं बना। भारत, बना लेकिन देश दुनियां में इस देश का अंग्रेजी संस्करण सर चढ़ कर बोलता है जी हां - इंडिया। वैसे इंडी हिन्दू शब्द का अंग्रेजी का अपभ्रंश ही है। आज १४ (14)सितंबर है। इसी दिन १९४९(1949) के साल में संविधान सभा में निर्णय लिया गया था कि हिंदी को स्थापित करने के लिए हर साल १४(14)सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाएगा ताकि याद रहे कि भारत सरकार की राज भाषा "हिंदी" है।
७६(76)साल गुजर गए। हमें गर्व होना चाहिए दो व्यक्तियों और एक मनोरंजन संस्थान पर जिनके चलते हिंदी भाषा ने गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में ऐसा अतिक्रमण किया कि ऐसे राज्य जो हिंदी का विरोध करते आए, उनके राज्यों में हिंदी न बोलना विवशता होगी पर समझने की झकमारी जरूर है। हिंदुस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह ने बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए हिंदुस्तान में द्वार खोले।
पुणे,चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद ऐसे केंद्र बने जहां देश भर के प्रतिभावान विद्यार्थी आरक्षण से परे निजी क्षेत्रों में नौकरी पाए। हिंदी भाषी क्षेत्रों के लोगों ने रोजगार के लिए जोखिम उठाया। इनके साथ साथ हिंदी भाषा क्षेत्रों की संस्कृति, खानपान, पहनावा भी पहुंच गया। जिस प्रकार आप हिंदी भाषी क्षेत्रों में इडली दौसा खा रहे है वैसे ही गैर हिंदी भाषी क्षेत्रों में समोसा आलूगुंडा आसानी से मिल रहा है। हिंदी भाषा का प्रचार और प्रसार जिस मनोरंजन संस्थान ने सालों से किया उसका उल्लेख किया जाना जरूरी है। ये मनोरंजन संस्थान है - बॉलीवुड(इसका हिंदी नाम हो बताइएगा)। हिंदी भाषा में अमूमन हर साल सौ से अधिक फिल्मे बनती है।
जो न चाहते हुए भी गैर हिंदी भाषाई क्षेत्रों में लगती है। इनके गाने चौबीसों घंटे रेडियो में प्रमुखता से बजते है जिसके कारण हिन्दी दिलो दिमाग पर असर करती है। दक्षिण के फिल्म कलाकारों को भी हिंदी की महत्ता की मजबूरी है क्योंकि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित होने के लिए हिंदुस्तान में समृद्ध होना जरूरी है। आप हिंदी को समृद्ध माने ये हिंदी दिवस की अपेक्षा है।१९८१(1981) में एक फिल्म आई थी - एक दूजे के लिए।ये फिल्म भाषाई भेदभाव के बावजूद दो युवाओं के बीच पनपते प्रेम की मार्मिक प्रस्तुतीकरण थी। हिंदी भाषी नायिका और हिंदी न समझने वाला नायक याने खूबसूरत रति अग्निहोत्री और संवेदनशील तमिल नायक कमल हसन के बेमिसाल अभिनय की फिल्म थी। इस फिल्म ने सफलता के रिकॉर्ड तोड़े थे। गायक श्रीपति पंडितराध्युल बाला सुब्रमण्यम(पी बाला सुब्रमण्यम) जो तेलुगु भाषी है उनके गाये गीतों ने समां बांधा था। हिंदी दिवस के दिन इस फिल्म का एक संवाद जो अंतर्मन को छूता है - हिंदी बहुत मीठी है।
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