आनंद कारज विवाह के पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू करने के सुप्रीम कोर्ट ने दिये निर्देश

feature-top

सुप्रीम कोर्ट ने आनंद कारज यानी सिख विवाह के पंजीकरण को लेकर अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया है कि वे चार महीने के भीतर विवाह पंजीकरण नियमों को अधिसूचित करें।

न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने कहा कि धर्मनिरपेक्ष व्यवस्था का अर्थ है – धार्मिक पहचान का सम्मान करना और नागरिकों के बीच समानता सुनिश्चित करना। इसलिए, आनंद कारज से होने वाले विवाहों को भी अन्य विवाहों की तरह ही दर्ज और प्रमाणित किया जाना चाहिए।

पीठ ने टिप्पणी की कि किसी भी संवैधानिक वादे की असली ताकत सिर्फ अधिकार देने में नहीं, बल्कि उन संस्थाओं में होती है जो इन अधिकारों को व्यवहारिक और उपयोगी बनाती हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि एक धर्मनिरपेक्ष गणराज्य में राज्य को किसी भी नागरिक की आस्था को न तो विशेषाधिकार देना चाहिए और न ही बाधा बनाना चाहिए।


feature-top