केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है, तो उसे दूसरी या तीसरी शादी करने का अधिकार नहीं है यहाँ तक कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत भी।

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केरल हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि यदि कोई मुस्लिम पुरुष अपनी पत्नी का भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं है, तो उसे दूसरी या तीसरी शादी करने का अधिकार नहीं है यहाँ तक कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत भी।

यह टिप्पणी 39 वर्षीय महिला की याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई।

हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि भले ही मुस्लिम पर्सनल लॉ में बहुविवाह की अनुमति हो, लेकिन आर्थिक रूप से असमर्थ व्यक्ति को दूसरी या तीसरी शादी करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता।


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