जीत के बाद पैसे की भी बात हो जाए!
संजय दुबे
हरमन प्रीत कौर की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए सेमीफाइनल और फाइनल में ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण अफ्रीका को हरा कर पहली बार विश्व विजेता होने का गौरव हासिल किया है। इस जीत के बदले भारतीय महिला क्रिकेट टीम को करोड़ रुपए नगद मिले है।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने भी 51 करोड़ की राशि देने की घोषणा कर विजेताओं को सम्मानित कर दिया है। टीम के खिलाड़ियों को उनके राज्य सहित अनेक संस्थानों से इस जीत के बदले धन राशि सहित उपहार मिलेगा ये भी तय है। दुखती रग की बात तो ये है कि संविधान में लिंग के आधार पर भेदभाव न होने का संवैधानिक अधिकार ऐसे जगह पर स्खलित होते दिखता है जहां पुरुष और महिला के बीच समानता के बजाय असमानता की बात होती है। इस भेदभाव को देखना हो तो भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को देखा जा सकता है।
बोर्ड का पुरुष और महिलाओं के लिए दोहरा मापदंड है उन कांट्रेक्ट खिलाड़ियों के बीच जो पुरुष और स्त्री है। भारत में तीन केटेगरी के खिलाड़ियों के साथ बोर्ड सालाना अनुबंध करता है और इसके एवज में निर्धारित राशि का भुगतान करता है। पुरुष प्रधान समाज में जब पुरुषों का बहुमत ही निर्णय ले तो ये तय है कि प्रमुखता पुरुषों को मिलेगी, महिलाओं को नहीं।
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड में भी पुरुषों का ही बहुमत है। देखिए, जब बोर्ड पुरुष खिलाड़ियों से अनुबंध करता है तो चार वर्ग बनते है -A+,A,B और C वर्ग। इन वर्ग के खिलाड़ियों को क्रमशः सात,पांच तीन और एक करोड़ रुपए साल के मिलते है A+ वर्ग में चार खिलाडी है। रोहित शर्मा,विराट कोहली, जसप्रीत बुमराह और रविन्द्र जडेजा A वर्ग में मो शिराज, के एल राहुल, शुभमन गिल ,हार्दिक पंड्या, मो शमी और ऋषभ पंत है। B वर्ग में सूर्य कुमार यादव, कुलदीप यादव,अक्षर पटेल ,यशस्वी जायसवाल, और श्रेयस अय्यर है।
C वर्ग में रिंकू सिंह, तिलक वर्मा, शिवम् दुबे, रवि विश्नोई, वॉशिंगटन सुंदर, मुकेश कुमार, संजू सैमसन, अर्शदीप, प्रसिद्ध कृष्णा, रजत पाटीदार, ध्रुव जुरैल, सरफराज खान, नीतीश रेड्डी, ईशान किशन ,अभिषेक शर्मा, आकाशदीप ,सी अरुण और हर्षित राणा है। अब महिला खिलाड़ियों को मिलने वाला पैसा जो बीसीसीआई देता है उसे देखिए महिलाओं में A+ वर्ग नहीं है। पहला भेद तो यही दिखता है। A,B और C वर्ग है जिसमें क्रमशः 50,30 और 10लाख रुपए साल के मिलते है। A वर्ग में हरमनप्रीत कौर,स्मृति माँधना और दीप्ति शर्मा है। B वर्ग में रेणुका ठाकुर, ज़ेमिमाह रॉड्रिक्स, ऋचा घोष और शैफाली वर्मा है। C वर्ग में यास्तिका भाटिया,राधा यादव, श्रेयंका पाटिल, तितास साधु, अरुंधति रेड्डी, अमनजोत कौर,उमा क्षेत्री, स्नेह राणा और पूजा वस्त्रकार है। पुरुषों में 33 और महिलाओं में केवल 16 खिलाड़ी अनुबंधित है। दोनों के भुगतान अंतर देखे तो A वर्ग के पुरुष खिलाड़ी 5करोड़ रुपए पा रहे है।
महिला खिलाड़ी केवल 50 लाख पा रही हैं। चौदह गुना का फर्क है। पुरुषों के B वर्ग के खिलाड़ी 3करोड़ रुपए साल का पा रहे हैं । इस वर्ग की महिला खिलाड़ी सिर्फ बीस लाख रुपए साल का पा रही है। पंद्रह गुना कम मिल रहा है C वर्ग के पुरुष खिलाड़ी एक करोड़ रुपए साल का पा रहे है महिला खिलाड़ी केवल दस लाख पा रही है।दस गुना कम मिल रहा है। जब टेस्ट, वनडे और टी ट्वेंटी खेलने के लिए फीस बराबरी से पंद्रह, छः और तीन लाख दिए जा रहे है तो कांट्रेक्ट राशि भी समान होना चाहिए।
बीसीसीआई की सालाना कमाई दस हजार करोड़ रुपए की है। केवल 66करोड़ रुपए देना है। प्रधान मंत्री नरेन्द्र मोदी चाहे तो विश्व कप विजेता महिला टीम को ये सौगात दिला सकते है।आखिर घर का मामला है और बात सशक्तीकरण की भी है और समानता का भी
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