दिल्ली के पास 11 कोयला प्लांट्स से होने वाले एमिशन की 10 साल तक कोई मॉनिटरिंग नहीं: RTI

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दिल्ली ज़हरीली धुंध की चपेट में है और एयर क्वालिटी इंडेक्स 400 के पार 'गंभीर' कैटेगरी में पहुंच गया है, जिसके कारण NCR में GRAP-3 की कड़ी पाबंदियों को जल्दबाजी में फिर से लागू करना पड़ा है।

लेकिन भारत में वायु प्रदूषण की निगरानी में भारी लापरवाही का खुलासा हुआ है, जब सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB) ने एक RTI जवाब में माना है कि उसने एक दशक से ज़्यादा समय से दिल्ली के 300 किमी के दायरे में मौजूद 11 कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स में से किसी में भी चिमनी से निकलने वाले धुएं की कोई व्यापक निगरानी नहीं की है।

इसका मतलब है कि NTPC दादरी और अन्य बड़े प्रदूषण फैलाने वाले प्लांट लगातार पार्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाइऑक्साइड और ज़हरीले टॉक्सिन हवा में छोड़ रहे हैं, जो सीधे दिल्ली के जानलेवा वायु प्रदूषण को बढ़ा रहे हैं। 2015 के आदेशों के बावजूद कोई जुर्माना नहीं लगाया गया है, जिनमें इन प्लांट्स को फ्लू गैस डिसल्फराइजेशन (FGD) सिस्टम लगाने और सख्त नियमों का पालन करने की ज़रूरत थी। इस तरह GRAP जैसे छोटे-मोटे उपाय सिर्फ़ एक बड़े रेगुलेटरी घाव पर पट्टी लगाने जैसा है, जबकि इस बड़े सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट के लिए तुरंत जवाबदेही तय करने की ज़रूरत है।

इस दायरे में लगभग 11 कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट्स की 35 यूनिट्स चल रही हैं, जो मुख्य रूप से हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश में हैं।


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