RSS में बड़ा संगठनात्मक बदलाव, प्रांत प्रचारक व्यवस्था समाप्त

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने अपने 100 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संगठनात्मक ढांचे में एक बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। देश के सबसे बड़े गैर-राजनीतिक संगठन ने अपनी कार्यपद्धति में संशोधन करते हुए अब प्रांत प्रचारक की व्यवस्था को समाप्त करने का फैसला किया है।

अब तक संघ की संगठनात्मक संरचना में प्रांत प्रचारक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती रही है, लेकिन नए बदलाव के तहत उनके स्थान पर संभाग प्रचारक की व्यवस्था लागू की जाएगी। इस परिवर्तन के साथ संघ की प्रशासनिक और संगठनात्मक इकाइयों में भी पुनर्गठन किया जा रहा है। अब तक आरएसएस अपनी सुविधा और संगठनात्मक जरूरतों के अनुसार एक ही राज्य में कई प्रांत बनाता रहा है।

उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में मेरठ प्रांत, ब्रज प्रांत, अवध प्रांत, गोरक्ष प्रांत, काशी प्रांत और कानपुर प्रांत सहित कुल छह प्रांत थे। नए ढांचे के तहत अब प्रांत की जगह संभागीय व्यवस्था लागू होगी। संघ के इस निर्णय को संगठन को और अधिक प्रभावी, समन्वित और वर्तमान परिस्थितियों के अनुरूप बनाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

आने वाले समय में इस नई व्यवस्था के तहत संघ की कार्यप्रणाली कैसे संचालित होगी, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।


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