अगले चुनाव तक ऑनलाइन वोटिंग शुरू हो जाए तो हैरानी नहीं — CJI सूर्यकांत

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चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि वह किसी व्यक्ति की नागरिकता का निर्धारण केवल मतदाता के रूप में पंजीकरण के संदर्भ में ही कर सकता है। आयोग ने स्पष्ट किया कि उसके पास न तो किसी को निर्वासित करने की शक्ति है और न ही यह तय करने का अधिकार कि किसी व्यक्ति के पास भारत में रहने का वैध वीज़ा है या नहीं।

इस मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने हल्के-फुल्के अंदाज़ में टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर अगले चुनावों तक ऑनलाइन मतदान शुरू हो जाए तो इसमें कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने उन याचिकाओं पर अंतिम सुनवाई दोबारा शुरू की है, जिनमें बिहार समेत कई राज्यों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।

इन याचिकाओं में चुनाव आयोग की शक्तियों की सीमा, नागरिकता और मताधिकार से जुड़े अहम संवैधानिक सवाल उठाए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष चुनाव आयोग की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी ने पक्ष रखा।

उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 326 का हवाला देते हुए कहा कि यह अनुच्छेद वयस्क मताधिकार के आधार पर चुनावों का प्रावधान करता है। अधिवक्ता द्विवेदी ने दलील दी कि संवैधानिक दृष्टि से वयस्क मताधिकार में तीन अलग-अलग तत्व शामिल हैं और मतदाता पंजीकरण के समय इन तीनों शर्तों का पूरा होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक ये सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक कोई भी व्यक्ति मतदाता के रूप में पंजीकृत होने का अधिकार नहीं रखता।


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