सहमति वाले रिश्ते अपराध नहीं, पॉक्सो का दायरा सीमित: दिल्ली हाईकोर्ट

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दिल्ली हाईकोर्ट ने पॉक्सो एक्ट के तहत दर्ज एक मामले में 19 वर्षीय आरोपी को नियमित जमानत दे दी है।

न्यायमूर्ति विकास महाजन की एकल पीठ ने कहा कि पॉक्सो कानून नाबालिगों को यौन शोषण से बचाने के लिए बनाया गया है, न कि निकट आयु के युवाओं के बीच सहमति से बने रोमांटिक रिश्तों को अपराधी ठहराने के लिए।

कोर्ट ने माना कि आरोपी और नाबालिग पीड़िता के बीच स्वैच्छिक संबंध थे और दोनों की उम्र में ज्यादा अंतर नहीं था। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पूर्व-ट्रायल हिरासत दंडात्मक नहीं हो सकती और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता का सम्मान किया जाना चाहिए।

हालांकि, जमानत देते समय अदालत ने शर्तें लगाईं, जिनमें गवाहों से छेड़छाड़ न करना और ट्रायल कोर्ट में नियमित पेशी शामिल है। कोर्ट ने साफ किया कि ये टिप्पणियां केवल जमानत तक सीमित हैं और ट्रायल पर इनका कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।


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