पर्यावरण संरक्षण में ढिलाई बर्दाश्त नहीं: सुप्रीम कोर्ट

feature-top

सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियमों के पालन में ‘असमान’ स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि मौजूदा क्रियान्वयन की खामियों के रहते आज की पीढ़ी आगे के विधायी सुधारों का इंतजार नहीं कर सकती।

न्यायमूर्ति पंकज मिथल और न्यायमूर्ति एसवीएन भट्टी की पीठ ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ और स्वस्थ पर्यावरण का अधिकार, जीवन के अधिकार का अभिन्न हिस्सा है। अदालत ने 1 अप्रैल से प्रभावी होने जा रहे ठोस कचरा प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए कार्यपालिका को आवश्यक तंत्र सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

कोर्ट ने कहा कि नगरपालिका ठोस कचरे की उपेक्षा का असर केवल स्वास्थ्य पर ही नहीं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

पीठ ने यह भी कहा कि जब दुनिया प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भारत की ओर देख रही है, तब 2026 के नियमों का पूर्ण और सख्त पालन सुनिश्चित करना समय की मांग है।


feature-top