भाषण या फिल्मों से किसी समुदाय को निशाना नहीं बनाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने नेटफ्लिक्स की फिल्म घूसखोर पंडत से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करते हुए बड़ी टिप्पणी की।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किसी भी व्यक्ति, चाहे वह राज्य का प्रतिनिधि हो या गैर-राज्य अभिनेता, को भाषण, मीम, कार्टून या दृश्य कला के माध्यम से किसी भी समुदाय को बदनाम या अपमानित करना सांविधानिक रूप से स्वीकार्य नहीं है।

अदालत ने साफ किया कि उच्च सांविधानिक पदों पर आसीन सार्वजनिक हस्तियां, जैसे मंत्री, यदि धर्म, जाति, भाषा या क्षेत्र के आधार पर किसी समुदाय को निशाना बनाती हैं तो यह संविधान का उल्लंघन होगा।

 यह टिप्पणी न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां ने अपने अलग निर्णय में की, जो नेटफ्लिक्स फिल्म 'घूसखोर पंडत' के शीर्षक को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा था।


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