सशस्त्र बलों और तटरक्षक बल की सेवानिवृत्ति आयु पर सुप्रीम कोर्ट ने किया हस्तक्षेप

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सुप्रीम कोर्ट ने सशस्त्र बलों और भारतीय तटरक्षक बल के सेवा मानदंडों तथा सेवानिवृत्ति आयु को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से पुराने नियमों की समीक्षा करने को कहा है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि ब्रिटिश काल से चले आ रहे सेवा नियमों पर पुनर्विचार किया जाए।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ केंद्र सरकार की अपील पर सुनवाई कर रही थी। यह अपील दिल्ली हाईकोर्ट के उस आदेश के खिलाफ दायर की गई थी, जिसमें भारतीय तटरक्षक बल के सभी स्तरों पर सेवानिवृत्ति आयु 60 वर्ष करने का निर्देश दिया गया था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने अपने पिछले वर्ष के फैसले में विभिन्न रैंकों के लिए अलग-अलग सेवानिवृत्ति आयु को असंवैधानिक ठहराते हुए सभी अधिकारियों के लिए समान रूप से 60 वर्ष की सेवानिवृत्ति आयु लागू करने का आदेश दिया था। वर्तमान नियमों के अनुसार कमांडेंट और उससे नीचे के अधिकारी 57 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होते हैं, जबकि वरिष्ठ अधिकारी 60 वर्ष तक सेवा में बने रहते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश पर फिलहाल रोक लगाते हुए केंद्र सरकार से कहा कि वह सेवा शर्तों और सेवानिवृत्ति आयु की व्यापक समीक्षा के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने पर विचार करे।

अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि ऐसे उच्च प्रशिक्षित बलों में अनुभव का महत्व अत्यधिक होता है और नीति निर्धारण में इस पहलू को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।


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