सुप्रीम कोर्ट का आया फैसला - बिहार SIR वैध

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सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए भारतीय चुनाव आयोग (ECI) द्वारा बिहार मतदाता सूची के लिए किए गए विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया को पूरी तरह वैध करार दिया है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने साफ किया कि चुनाव आयोग ने इस प्रक्रिया के दौरान किसी भी संवैधानिक या वैधानिक प्रावधान का उल्लंघन नहीं किया है।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले की मुख्य बातें

चुनाव आयोग का संवैधानिक अधिकार: शीर्ष अदालत ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग के पास SIR कराने का पूरा अधिकार है और इसका सीधा संबंध देश की चुनावी अखंडता से है।

याचिका परिवारों की दलीलें खारिज करें: 'एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स' (ADR), महुआ मोइत्रा और योगेंद्र यादव सहित कई विपक्षी नेताओं ने याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि SIR के माध्यम से वास्तविक आंकड़ों को बाहर किया जा रहा है और यह एक पिछले दरवाजे से नागरिकता सत्यापन (नागरिकता सत्यापन) का प्रयास है। कोर्ट ने इन सभी दलीलों को खारिज कर दिया।

सफाई बनाम नागरिकता जांच: कोर्ट ने माना कि चुनाव आयोग का यह कदम 'चुनावी शुद्धिकरण' (इलेक्टोरल शुद्धिकरण) के लिए है, न कि किसी की नागरिकता तय करने के लिए।


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