राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठन पश्चिम बंगाल के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अपनी सक्रियता बढ़ाने में जुट गए हैं। हाल के राजनीतिक बदलावों और भाजपा की चुनावी सफलता के बाद राज्य के कैंपसों में वैचारिक और संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की होड़ तेज हो गई है। RSS से जुड़े छात्र संगठनों द्वारा नए सदस्य जोड़ने, छात्र मुद्दों पर अभियान चलाने और सांस्कृतिक तथा राष्ट्रवादी कार्यक्रमों के जरिए युवाओं के बीच अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। खासतौर पर उन कैंपसों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां लंबे समय से वामपंथी और तृणमूल समर्थित छात्र संगठनों का प्रभाव रहा है।

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठन पश्चिम बंगाल के कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में अपनी सक्रियता बढ़ाने में जुट गए हैं। हाल के राजनीतिक बदलावों और भाजपा की चुनावी सफलता के बाद राज्य के कैंपसों में वैचारिक और संगठनात्मक पकड़ मजबूत करने की होड़ तेज हो गई है। RSS से जुड़े छात्र संगठनों द्वारा नए सदस्य जोड़ने, छात्र मुद्दों पर अभियान चलाने और सांस्कृतिक तथा राष्ट्रवादी कार्यक्रमों के जरिए युवाओं के बीच अपनी उपस्थिति बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। खासतौर पर उन कैंपसों पर ध्यान दिया जा रहा है जहां लंबे समय से वामपंथी और तृणमूल समर्थित छात्र संगठनों का प्रभाव रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच कैंपस राजनीति को भविष्य की राजनीतिक जमीन तैयार करने के तौर पर देखा जा रहा है। भाजपा और RSS से जुड़े संगठन युवाओं के बीच अपनी विचारधारा को मजबूत करने के लिए छात्र राजनीति को महत्वपूर्ण माध्यम मान रहे हैं।


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