टीएमसी में जाली हस्ताक्षर कांड से हड़कंप

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पश्चिम बंगाल विधानसभा में प्रस्तुत आधिकारिक दस्तावेजों पर कई पार्टी विधायकों के हस्ताक्षर जाली होने के आरोपों के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अपने सबसे गंभीर आंतरिक संकटों में से एक का सामना कर रही है। "साइनगेट" नाम से चर्चित इस विवाद के चलते सीआईडी ​​​​ने जांच शुरू कर दी है, जिसके चलते दो टीएमसी विधायकों को निष्कासित कर दिया गया है और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी जांच के दायरे में आ गए हैं।

जाली हस्ताक्षर कांड
विवाद पश्चिम बंगाल विधानसभा में 2026 के विधानसभा चुनावों के बाद विपक्ष के नेता और पार्टी के मुख्य सचेतक की नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों को लेकर है। आरोप लगे हैं कि दस्तावेजों पर मौजूद कई टीएमसी विधायकों के हस्ताक्षर या तो जाली हैं या उनकी उचित सहमति के बिना लगाए गए हैं।

यह विवाद तब और बढ़ गया जब टीएमसी विधायकों ऋतब्रता बनर्जी और संदीपान साहा ने विपक्ष के नेता पद के लिए वरिष्ठ टीएमसी नेता शोवनदेब चट्टोपाध्याय का समर्थन करने वाले पत्र में इस्तेमाल किए गए हस्ताक्षरों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाए। उनकी शिकायतों के बाद पश्चिम बंगाल अपराध जांच विभाग (सीआईडी) ने औपचारिक जांच शुरू की।

विधानसभा सचिव ने एफआईआर दर्ज कराई और जांचकर्ताओं ने विवादित दस्तावेजों में शामिल विधायकों से बयान और नमूना हस्ताक्षर एकत्र करना शुरू कर दिया। सीआईडी ​​अधिकारियों ने जांच के तहत कई टीएमसी विधायकों के बयान दर्ज कर लिए हैं।


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