भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें देशभर की अदालतों में लंबित मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मुकदमों में वर्षों तक होने वाली देरी नागरिकों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है और न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा कमजोर करती है। इसलिए अदालत को विभिन्न श्रेणियों के मामलों के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करनी चाहिए, ताकि मुकदमों का निपटारा अधिक तेज और प्रभावी ढंग से हो सके।

feature-top

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक जनहित याचिका (PIL) को खारिज कर दिया, जिसमें देशभर की अदालतों में लंबित मामलों के समयबद्ध निपटारे के लिए व्यापक दिशानिर्देश जारी करने की मांग की गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि मुकदमों में वर्षों तक होने वाली देरी नागरिकों के मौलिक अधिकारों को प्रभावित करती है और न्याय व्यवस्था में लोगों का भरोसा कमजोर करती है। इसलिए अदालत को विभिन्न श्रेणियों के मामलों के लिए एक निश्चित समय-सीमा तय करनी चाहिए, ताकि मुकदमों का निपटारा अधिक तेज और प्रभावी ढंग से हो सके।


feature-top