TMC में मची ऐतिहासिक बगावत को थामने के लिए ममता बनर्जी ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है, जिसमें उन्होंने अपने भतीजे (भाइपो) अभिषेक बनर्जी की शक्तियों को सीमित कर दिया है। पार्टी के 60 विधायकों द्वारा निष्कासित नेता ऋतब्रता बनर्जी को अपना नेता चुनने और कई सांसदों के भाजपा के संपर्क में होने की खबरों के बीच ममता ने बंगाल की सभी कमेटियों को भंग कर दिया। उन्होंने चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसे पुराने वफादारों को आगे बढ़ाया है; वहीं अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव पद पर तो बनाए रखा है, लेकिन उनके पर कतरने के लिए डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन जैसे वरिष्ठ नेताओं को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त कर दिया है ताकि अब पार्टी में कोई भी फैसला मनमाने ढंग से न लिया जा सके।

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TMC में मची ऐतिहासिक बगावत को थामने के लिए ममता बनर्जी ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल किया है, जिसमें उन्होंने अपने भतीजे (भाइपो) अभिषेक बनर्जी की शक्तियों को सीमित कर दिया है। पार्टी के 60 विधायकों द्वारा निष्कासित नेता ऋतब्रता बनर्जी को अपना नेता चुनने और कई सांसदों के भाजपा के संपर्क में होने की खबरों के बीच ममता ने बंगाल की सभी कमेटियों को भंग कर दिया। उन्होंने चंद्रिमा भट्टाचार्य जैसे पुराने वफादारों को आगे बढ़ाया है; वहीं अभिषेक बनर्जी को राष्ट्रीय महासचिव पद पर तो बनाए रखा है, लेकिन उनके पर कतरने के लिए डेरेक ओ'ब्रायन और डोला सेन जैसे वरिष्ठ नेताओं को संयुक्त राष्ट्रीय सचिव नियुक्त कर दिया है ताकि अब पार्टी में कोई भी फैसला मनमाने ढंग से न लिया जा सके।


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