स्पाइसजेट पर 1 लाख रुपये का जुर्माना

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सेंट्रल कंज्यूमर प्रोटेक्शन अथॉरिटी ने फैसला सुनाया कि स्पाइसजेट ने अपने 'लॉयल्टी प्रोग्राम' में यूज़र्स को ऑटोमैटिकली एनरोल किया, कंपनी के पसंदीदा ऑप्शन को डिफ़ॉल्ट चॉइस के तौर पर दिखाया और सहमति लेने के लिए "ट्रिक क्वेश्चन" का इस्तेमाल करके उन्हें गुमराह किया, और "डार्क पैटर्न" के लिए 1 लाख रुपये का जुर्माना लगाया।

CCPA के ऑर्डर ने स्पाइसजेट के प्लेटफॉर्म पर तीन डार्क पैटर्न को फ्लैग किया -

  • फोर्स्ड एक्शन (Forced Action): टिकट बुकिंग के दौरान ग्राहकों की बिना स्पष्ट सहमति के, पहले से टिक किए गए बॉक्स (Pre-ticked Checkbox) के जरिए उन्हें जबरन 'स्पाइसक्लब लॉयल्टी प्रोग्राम' में शामिल किया जा रहा था। 
  • इंटरफेस इंटरफेरेंस (Interface Interference): इस तरकीब के तहत वेबसाइट या ऐप के डिजाइन में कंपनी के पसंदीदा विकल्प को ही 'डिफ़ॉल्ट चॉइस' के रूप में दिखाया जाता था, ताकि उपभोक्ता का निर्णय प्रभावित हो सके। 
  • ट्रिक क्वेश्चन (Trick Question): सहमति लेने के लिए भ्रमित करने वाली और नकारात्मक भाषा (Negatively Worded Consent Language) का इस्तेमाल किया गया था, जिससे ग्राहक अनजाने में ऐसी सेवाओं के लिए हां कह दें जिन्हें वे नहीं चाहते थे। 

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