NALSAR यूनिवर्सिटी विवाद : चंद घंटों में झुकी BCI, NALSAR छात्रों पर से हटाया बैन

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बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने हैदराबाद की प्रतिष्ठित 'NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ' के वर्ष 2026 में ग्रेजुएट होने वाले छात्रों को लेकर एक बड़ा और राहत भरा फैसला सुनाया है। काउंसिल ने अपने उस पिछले आदेश को वापस ले लिया है, जिसमें इस बैच के छात्रों के देश की किसी भी स्टेट बार काउंसिल में एडवोकेट के तौर पर एनरोलमेंट पर रोक लगा दी गई थी। 

भले ही सामान्य छात्रों को राहत देते हुए नामांकन की अनुमति दे दी गई है, लेकिन काउंसिल ने मामले की पूरी जांच बंद नहीं की है। NALSAR यूनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर से इस पूरे घटनाक्रम पर एक विस्तृत तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी गई है। इस विवाद को शुरू करने, सोशल मीडिया या कैंपस में कोऑर्डिनेट करने और छात्रों को जुटाने वाले मुख्य चेहरों की पहचान की जा रही है। पहचान पूरी होने के बाद, इस साजिश के पीछे शामिल मुख्य व्यक्तियों के खिलाफ नियमों के तहत कड़ी वैधानिक और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

क्या था पूरा विवाद?
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ था जब NALSAR के ग्रेजुएट हो रहे छात्रों के एक गुट ने यूनिवर्सिटी के आगामी दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के प्रस्ताव पर आपत्ति जताई थी। छात्र दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के मामले की सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश द्वारा की गई कथित टिप्पणियों से नाराज थे और इसके विरोध में एक अभियान चला रहे थे। इस पर संज्ञान लेते हुए BCI चेयरपर्सन मनन कुमार मिश्रा ने शुरुआत में सख्त कदम उठाते हुए पूरे बैच के नामांकन पर अगले आदेश तक रोक लगा दी थी, जिसे अब व्यापक छात्र हित में संशोधित कर दिया गया है।


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