"विकास कार्य देखते ही 'नाराज़ फूफा' बन जाता है विपक्ष" : पीएम मोदी

feature-top

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली विश्वविद्यालय के श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स के शताब्दी समारोह में विपक्षी दलों पर एक अनोखा और तीखा तंज कसा। युवाओं और 'जेन-जी'  के छात्रों से भरे इस कार्यक्रम में पीएम मोदी ने विपक्ष की तुलना शादियों में रूठने वाले "नाराज फूफा" से कर दी। उन्होंने कहा कि देश में कुछ लोगों का पसंदीदा काम हर विकास कार्य का अंधा विरोध करना बन चुका है। "इसकी क्या जरूरत है?" — हर फूफा का परमानेंट डायलॉग

प्रधानमंत्री ने भारतीय परिवारों में शादी-ब्याह के माहौल का उदाहरण देते हुए मजाकिया और तल्ख लहजे में कहा:

"देश में दूसरी प्रजाति उन लोगों की है जो कोई भी काम शुरू होने पर 'नाराज फूफा' बन जाते हैं। उनका फेवरेट काम होता है हर काम का विरोध करना। इनका एक ही डायलॉग होता है— इसकी क्या जरूरत है? ये हर फूफा का परमानेंट डायलॉग होता है।"

  • विकास कार्यों पर उठाए सवाल: उन्होंने विपक्ष को घेरते हुए कहा कि जब देश में दुनिया का सबसे बड़ा स्टैच्यू (स्टैच्यू ऑफ यूनिटी), बुलेट ट्रेन, नया संसद भवन या यूपीआई (UPI) जैसी डिजिटल तकनीक लाई जा रही थी, तब इन 'फूफा जी' लोगों ने कमर कस ली और हर बार एक ही सवाल पूछा कि इसकी क्या जरूरत है!

'दिमागी नक्सल' पर फिर कसा तंज

भाषण के दौरान पीएम मोदी ने अपने 15 अगस्त के लाल किले के संबोधन का भी जिक्र किया : उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने आलोचकों को 'दिमागी नक्सल' कहकर एक "होम्योपैथिक दवा" दी थी। "होम्योपैथिक इलाज बीमारी को कुछ समय के लिए बढ़ा देता है। जैसे ही मैंने यह गोली दी, सारे मानसिक नक्सली बाहर आने लगे। लेकिन जनता उनका असली रंग देख रही है।"


feature-top