गिरफ्तारी का लिखित कारण न बताना संवैधानिक अधिकार का उल्लंघन : सुप्रीम कोर्ट

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देश की शीर्ष अदालत ने नागरिकों की निजी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए एक ऐतिहासिक और बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि गिरफ्तारी के तुरंत बाद आरोपी को उसकी गिरफ्तारी का लिखित कारण न देना उसके मौलिक अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि अगर जांच एजेंसियां इस संवैधानिक नियम का पालन नहीं करती हैं, तो ऐसी किसी भी गिरफ्तारी को असंवैधानिक और अवैध माना जाएगा।

न्यायमूर्ति उज्ज्वल भूइयां और न्यायमूर्ति अतुल चांदुरकर की पीठ ने यह अहम फैसला सुनाते हुए देश भर की पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं। 

 


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