OBC क्रीमी लेयर पर SC के फैसले को लागू करने के लिए केंद्र ने मांगा 2 साल का समय

feature-top

केंद्र सरकार ने ओबीसी क्रीमी लेयर के वर्गीकरण पर सुप्रीम कोर्ट के एक ऐतिहासिक फैसले को लागू करने के लिए दो साल का समय और इसे भविष्य के मामलों पर ही लागू करने की मांग की है। सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एडिशनल सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने अदालत से कहा कि इस फैसले को तुरंत या पिछली तारीख से लागू करने से "पूर्ण प्रशासनिक अराजकता" पैदा हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने केंद्र की इस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है l

 

सुप्रीम कोर्ट का फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन मामले में एक बड़ा फैसला सुनाया था। अदालत ने कहा था कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों या निजी क्षेत्र में काम करने वाले ओबीसी उम्मीदवारों के माता-पिता की केवल आय या वेतन को 'क्रीमी लेयर' से बाहर करने का एकमात्र आधार नहीं बनाया जा सकता।

अदालत ने इसे एक "भेदभावपूर्ण व्यवस्था" माना था। दरअसल, सरकारी कर्मचारियों के बच्चों के लिए क्रीमी लेयर का निर्धारण माता-पिता के पद/रैंक (ग्रुप ए, बी, सी, डी) के आधार पर होता है, न कि उनके वेतन के आधार पर। वहीं, पीएसयू और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के बच्चों के लिए वेतन को जोड़कर उन्हें क्रीमी लेयर में डाल दिया जाता था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने गलत ठहराया था। अदालत ने सरकार को इसे ठीक करने के लिए 6 महीने का समय दिया था।


feature-top