इलाहाबाद HC में अंदरूनी घमासान, जज ने 'फुल कोर्ट मीटिंग' को बताया 'दिखावा'

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इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस विनोद दिवाकर ने 'फुल कोर्ट' बैठकों में होने वाली चर्चाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि इन बैठकों की कार्यवाही में अलग-अलग जजों की सहमति या असहमति को दर्ज नहीं किया जाता है। 

पप्पू मेट उर्फ़ पप्पू बनाम यूपी राज्य और अन्य के मामले में 28 सितंबर के 80 पन्नों के फ़ैसले में जस्टिस दिवाकर ने यह भी कहा कि ऐसी धारणा बनी थी कि पिछली दो 'फ़ुल कोर्ट मीटिंग' (सभी जजों की बैठक) "वैसे ही पहले से तय या 'स्टेज-मैनेज्ड' थीं, जैसे सरकार भरोसे के वोट के दौरान अपने सदस्यों पर दबाव बनाती है"।


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