दिल्ली : केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय के संरक्षण पर सुप्रीम कोर्ट ने लिया स्वतः संज्ञान

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भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने नई दिल्ली में स्थित 135 साल पुराने केंद्रीय सचिवालय पुस्तकालय में जगह की गंभीर कमी पर स्वतः संज्ञान  लिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में आदेश पारित करते हुए देश के सबसे पुराने और सबसे बड़े संस्थागत पुस्तकालयों में से एक के दुर्लभ दस्तावेजों के संरक्षण पर गहरी चिंता जताई है। सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र सरकार की बुनियादी ढांचा विस्तार योजना की समीक्षा के लिए इस मामले की अगली सुनवाई इसी महीने के अंत में तय की है। 

केंद्र सरकार को नोटिस जारी: अदालत ने इस ऐतिहासिक संकट पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय और केंद्रीय लोक निर्माण विभाग को नोटिस जारी किया है। कोर्ट ने अधिकारियों को पुस्तकालय के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने और अतिरिक्त स्थान आवंटित करने के लिए एक व्यापक ब्लूप्रिंट पेश करने का निर्देश दिया है।

पुस्तकालय का ऐतिहासिक महत्व: वर्ष 1891 में कलकत्ता में 'इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी' के रूप में स्थापित इस पुस्तकालय में वर्तमान में 8.5 लाख से अधिक पुस्तकों और ऐतिहासिक दस्तावेजों का विशाल संग्रह है। यह नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं और कानूनी विद्वानों के लिए ज्ञान का एक बहुत बड़ा केंद्र है।


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