मृतकों का आंकड़ा: हालांकि प्रशासनिक रिकॉर्ड में आधिकारिक तौर पर 32 या 35 मौतों की बात कही जा रही है, लेकिन आदिवासी संगठनों और याचिकाकर्ता का दावा है कि पिछले चार महीनों में मरने वाले बच्चों की संख्या कम से कम 45 तक पहुंच चुकी है। तीन राज्यों में असर: यह संकट मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा और बैहर ब्लॉक में केंद्रित है, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील वरुण ठाकुर ने अदालत में दलील दी कि यह वन क्षेत्र छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमाओं से लगा हुआ है, इसलिए इसका असर पड़ोसी राज्यों के आदिवासी इलाकों पर भी पड़ रहा है। मौत का मुख्य कारण: क्षेत्र का दौरा करने वाली स्वास्थ्य टीमों ने पुष्टि की है कि इन मौतों की मुख्य वजह खसरा और रूबेला का प्रकोप है। यह वायरस उन बच्चों के लिए ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है जो पहले से ही अत्यधिक कुपोषण और विटामिन-ए की कमी से जूझ रहे हैं

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सुप्रीम कोर्ट ने आदिवासी बच्चों की मौत को "बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बात" बताते हुए केंद्र सरकार और तीन राज्यों (मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र) से तत्काल जवाब मांगा है। भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने बालाघाट के निवासी अजब लाल लिल्हारे द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की। इस याचिका में राज्यों की सीमाओं से लगे आदिवासी क्षेत्रों विशेष रूप से बैगा जनजाति में गंभीर कुपोषण और संक्रामक बीमारियों के प्रकोप के कारण बच्चों की हो रही मौतों पर गहरा संकट जताया गया है।

  • मृतकों का आंकड़ा: हालांकि प्रशासनिक रिकॉर्ड में आधिकारिक तौर पर 32 या 35 मौतों की बात कही जा रही है, लेकिन आदिवासी संगठनों और याचिकाकर्ता का दावा है कि पिछले चार महीनों में मरने वाले बच्चों की संख्या कम से कम 45 तक पहुंच चुकी है।
  • तीन राज्यों में असर: यह संकट मुख्य रूप से मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बिरसा और बैहर ब्लॉक में केंद्रित है, लेकिन याचिकाकर्ता के वकील वरुण ठाकुर ने अदालत में दलील दी कि यह वन क्षेत्र छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की सीमाओं से लगा हुआ है, इसलिए इसका असर पड़ोसी राज्यों के आदिवासी इलाकों पर भी पड़ रहा है।
  • मौत का मुख्य कारण: क्षेत्र का दौरा करने वाली स्वास्थ्य टीमों ने पुष्टि की है कि इन मौतों की मुख्य वजह खसरा और रूबेला का प्रकोप है। यह वायरस उन बच्चों के लिए ज्यादा जानलेवा साबित हो रहा है जो पहले से ही अत्यधिक कुपोषण और विटामिन-ए की कमी से जूझ रहे हैं

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