CJP प्रदर्शन : पुलिस कार्रवाई में छात्र घायल, पत्रकार हिरासत में; सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर विवाद

feature-top

सुप्रीम कोर्ट द्वारा प्रदर्शनकारियों के शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने के हालिया निर्देशों के बावजूद, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली एक बार फिर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़पों का मैदान बन गई। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के दूसरे दिन पुलिसिया बल प्रयोग के कारण कई छात्र लहूलुहान हो गए और कवरेज कर रहे पत्रकारों को भी हिरासत में लिया गया।

  • लहूलुहान हुए छात्र प्रदर्शनकारी: जंतर-मंतर की ओर बढ़ रहे छात्रों और सुरक्षा बलों के बीच तीखी झड़प हुई। स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज और भारी बल प्रयोग किया। इस कार्रवाई में कई छात्र गंभीर रूप से घायल हो गए और उनके सिर व चेहरों से खून बहते हुए देखा गया।
  •  पत्रकारों को बनाया गया निशाना: ग्राउंड जीरो पर रिपोर्टिंग कर रहे स्वतंत्र और मुख्यधारा के कई मीडियाकर्मियों को दिल्ली पुलिस ने जबरन हिरासत में ले लिया। पत्रकारों का आरोप है कि उनके आधिकारिक प्रेस क्रेडेंशियल दिखाने और यह बताने के बावजूद कि वे ड्यूटी पर हैं, पुलिस ने उन्हें बसों में भर दिया और उनके कैमरों व फोन को भी छीनने का प्रयास किया।
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी का आरोप: नागरिक समाज और प्रदर्शनकारी संगठनों ने पुलिस की इस कार्रवाई को सुप्रीम कोर्ट के हालिया आदेश का सीधा उल्लंघन बताया है। अदालत ने स्पष्ट रूप से शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के दौरान नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा करने और अत्यधिक पुलिस बल के प्रयोग से बचने का निर्देश दिया था।
  • राजधानी में 'अघोषित लॉकडाउन' जैसे हालात: लुटियंस दिल्ली, पार्लियामेंट स्ट्रीट और जंतर-मंतर जाने वाले सभी रास्तों को पूरी तरह से सील कर दिया गया था। दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों की भारी तैनाती के कारण मध्य दिल्ली के कई इलाकों में आवाजाही पूरी तरह ठप रही, जिससे आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।
  • पुलिस का पक्ष: दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने बल प्रयोग के आरोपों का बचाव करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों ने लागू की गई निषेधाज्ञा (Section 163 BNSS) का उल्लंघन किया और बैरिकेड्स तोड़ने की कोशिश की। पुलिस के अनुसार, कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रतिबंधित क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'न्यूनतम बल' का प्रयोग आवश्यक था।
     

feature-top