बेंगलुरु कोर्ट ने मीडिया पर सिद्धारमैया को हनी-ट्रैप वीडियो से जोड़ने पर लगाई रोक

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बेंगलुरु की एक अदालत ने 42 मीडिया संगठनों, टेक कंपनियों और डिजिटल प्लेटफॉर्म को कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया को हनी-ट्रैप विवाद से जोड़ने वाले वीडियो प्रसारित या शेयर करने से रोक दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया द्वारा दायर मानहानि के मुकदमे पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त नगर दीवानी एवं सत्र न्यायाधीश बी. पुष्पांजलि ने यह अंतरिम आदेश पारित किया।

विवाद की पृष्ठभूमि

यह कानूनी विवाद दो डिजिटल प्रसारणों पर आधारित है: पहला 27 सितंबर को यूट्यूब पर अपलोड किया गया वीडियो जिसका शीर्षक "कर्नाटक हनी ट्रैप नेक्सस पार्ट 1" था, और दूसरा 2 अक्टूबर को फ्रीडम टीवी कन्नड़ द्वारा प्रसारित कार्यक्रम जिसका शीर्षक "लाइव: कर्नाटक की राजनीति में सबसे बड़ा सीडी ब्लास्ट?" था।

इन रिकॉर्डिंग्स में एक महिला ने 2011 की एक कथित घटना का हवाला देते हुए यौन दुराचार के आरोप लगाए थे और दावा किया था कि वह उस समय नाबालिग थी। इन वीडियो के साथ लिखे गए संदेशों में यह संकेत दिया गया था कि यह बातचीत राजनीतिक ब्लैकमेल से जुड़ी है और इसी वजह से सिद्धारमैया को इस साल की शुरुआत में मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

सिद्धारमैया ने सभी आरोपों को पूरी तरह से निराधार, मनगढ़ंत और राजनीति से प्रेरित चरित्र हनन बताते हुए खारिज किया है। उनकी कानूनी टीम ने कथित घटना और वीडियो के प्रकाशन के बीच 15 साल के लंबे अंतर की ओर इशारा किया, और कहा कि इस मामले में न तो कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज है और न ही कोई प्रमाणित सबूत मौजूद है।


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