FCRA बिल पर सियासी बहस के बीच संजय जायसवाल की सफाई

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भाजपा सांसद संजय जायसवाल, जो विदेशी अंशदान संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill, 2026) की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति के प्रमुख हैं, ने कहा कि प्रस्तावित कानून के मुख्य प्रावधानों में वही धाराएं शामिल हैं जो 2010 में यूपीए (UPA) सरकार द्वारा बनाए गए कानून में शामिल थीं। जायसवाल ने यह बात समिति की एक अहम बैठक के बाद कही, जिसमें हिंदू, ईसाई और अन्य सामाजिक व धार्मिक समूहों के साथ-साथ कानूनी विशेषज्ञों के विचारों और सुझावों को सुना गया।

विवाद और सरकार का रुख

विपक्ष और नागरिक संगठनों की चिंताएं: कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित विपक्षी दलों और कुछ नागरिक समाज संगठनों का आरोप है कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से ईसाई एनजीओ और उनके द्वारा संचालित कल्याणकारी व शैक्षणिक संस्थानों की वैध फंडिंग को रोकने या प्रभावित करने का काम कर सकता है।

सरकार का स्पष्टीकरण: केंद्र सरकार और नागरिक उड्डयन या गृह मंत्रालय के प्रतिनिधियों ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। सरकार का कहना है कि यह कानून किसी विशेष धर्म को लक्षित नहीं करता है, बल्कि इसका उद्देश्य विदेशों से मिलने वाले धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना है। सरकार ने विपक्ष को चुनौती दी है कि वे विधेयक में एक भी ऐसा प्रावधान दिखाएं जो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करता हो।


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